बड़ौत। असारा गांव में शनिवार की रात किसान अबलू के घर पर की गई अंधाधुंध फायरिंग में घायल उसकी पत्नी सबीला ने मेरठ के अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस मामले में अब मरने वालों की संख्या तीन हो गई है, जबकि अस्पताल में भर्ती बाकी दो घायलों में अबलू की पुत्रवधू साजिदा की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। दूसरी ओर तिहरे हत्याकांड के बाद गांव में दूसरे दिन भी दहशत भरा सन्नाटा रहा। अबलू के घर सांत्वना देने वालों की भीड़ लगी रही।
फायरिंग में अबलू और उसकी बेटी गुलशाना की मौके पर ही मौत हो गई थी। अबलू की पत्नी सबीला, बेटा अखलाक और पुत्रवधू साजिदा गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। साजिदा के गर्भस्थ शिशु की भी जान चली गई थी। उसे मृत अवस्था में ऑपरेशन करके निकाला गया। इसके बाद सबीला भी सोमवार को जिंदगी की जंग हार गई। उधर, गांव में दूसरे दिन भी दहशत भरा सन्नाटा रहा। अबलू के घर उसके रिश्तेदार दूर दूर से पहुंच रहे हैं। सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी है। मोहल्ले में डर बना है कि कहीं यह रंजिश एक और वारदात न करा दे। पानीपत से आई अबलू की मुंह बोली बहन विद्या का कहना था कि अगर उसे पता होता कि उसके भाई की जान खतरे में है तो वह पहले ही आकर उसका कवच बन जाती।
एक महीने से फिराक में था शकील
बड़ौत। अबलू के बेटे तासीम ने बताया कि तिहरे हत्याकांड में नामजद कराया गया शकील एक महीने से इस घटना की फिराक में था। तासीम घटना के वक्त बाहर गया हुआ था। उसने बताया कि एक महीने पहले जब वह बाजार में कपड़ों पर प्रेस कराने गया था, तब शकील ने उसके साथ न केवल मारपीट की थी बल्कि गोली भी चलाई थी। उसने पुलिस को भी बताया था, लेकिन न जाने क्यों थाना पुलिस ने एक्शन नहीं लिया। इसके बाद शकील ने काला और साजिदा के साथ भी मारपीट की, लेकिन तब भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। अगर पुलिस ने उनकी मदद की होती तो इतनी बड़ी वारदात न होती।