बागपत। जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बनने की उम्मीद को एक बार फिर जोर का झटका लगा है। 17 साल के इंतजार के बाद प्रशासन ने पोस्टमार्टम हाउस के लिए जमीन चिन्हित की थी। जिस किसान की यह भूमि थी, वह भी सर्किल रेट पर प्रशासन को देने के लिए तैयार था। डीएम धनलक्ष्मी के. ने मुआयना करने के बाद इसे फाइनल भी कर दिया था, लेकिन जैसे ही प्रस्ताव तैयार होना शुरू हुआ, किसान ने जमीन देने से साफ मना कर दिया। अब जमीन की तलाश नए सिरे से की जाएगी।
डीएम ने इसके लिए तहसील प्रशासन को सात दिन का समय दिया है। प्रशासन के पास जो विकल्प हैं, उनमें से एक पक्का घाट के पास की जमीन है। दूसरा चीनी मिल के अंदर खाली पड़ी भूमि है। तीसरा मीतली गांव में सरकारी जमीन है और चौथा दिल्ली रोड पर लंबे अरसे से बंद पड़ा कब्रिस्तान है। इनके अलावा भी कई जगह ऐसी जमीन देखी जा रही है जिसे भूस्वामी सर्किल रेट पर देने के लिए तैयार हो। रोडवेज समझौते के आधार पर सर्किल रेट पर जमीन खरीदने के लिए तो तैयार हैं लेकिन अधिगृहण की प्रक्रिया से बचना चाहता है। इस चक्कर में बागपत को जिला बनने के 17 साल बाद भी बस अड्डा नहीं मिल पा रहा है। डीएम का कहना है कि सात दिन के भीतर ही बस अड्डे के लिए जमीन का चयन कर प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
सूरज ढलते ही बस सेवा बंद
बागपत। बस अड्डा न होने के चलते जिला मुख्यालय पर सूरज ढलते ही बस सेवा बंद हो जाती है। न तो मेरठ के लिए बस मिलती है और न ही सोनीपत के लिए। दिल्ली के लिए भी रात में इक्का-दुक्का ही बस है। बस अड्डा न होने के चलते दूसरी परेशानी हाईवे टूटा होने से आ रही है। सहारनपुर और लोनी डिपो इस रोड पर बसें चलाना नहीं चाहते।