मटौंध (बांदा)। कस्बे में रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक ऋचा गोस्वामी (अमरकंटक) ने भक्तों को मृत्यु की हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने राजा परीक्षित का वृतांत सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को शुकदेव जी कथा सुना रहे थे। उनका उसमें मन नहीं लग रहा था। इस पर शुकदेव ने उन्हें सुनाया कि एक राजा शिकार खेलने गया तो भटक गया। रात में जगंल में एक कुटिया में चिराग जलता नजर आया। राजा ने कुटिया में रह रहे सन्यासी से रात विश्राम की अनुमति मांगी। सन्यासी ने इंकार करते हुए कहा कि कुटिया में गंदगी ज्यादा है। यहां मलमूत्र भरा पड़ा है। यदि तुम्हें शरण दी तो तुम कुटिया से जाने का मन नहीं करोगे। बताया कि यह कुटिया कुछ और नहीं बल्कि यह शरीर है। लोग मृत्यु से डरकर शरीर त्यागने का मन नहीं कर रहे हैं। राजा परीक्षित को ज्ञान हो गया। रामलीला कमेटी के रामबाबू सिंह ने बताया कि भागवत कथा के समापन पर कमेटी की ओर से कस्बे में 30 दिसंबर से तीन दिवसीय रामलीला का आयोजन होगा। 29 दिसंबर को कन्या भोज, 30 को धनुष यज्ञ, 31 को रामविवाह तथा एक जनवरी को राम वन गमन का मंचन होगा। ब्यूरो