बरेली। महात्मा गांधी रोजगार योजना (मनरेगा) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय और प्रदेश सरकार जितनी गंभीर है, इसके लिए जिम्मेदार अफसर उतने तत्पर नहीं हैं। यही वजह है कि योजना में महज 3.66 फीसदी महिलाओं की भागीदारी से बरेली को सूबे में सबसे निचले पायदान पर ले जाने के बाद भी जिले में जिम्मेदार तंत्र गंभीर नजर नहीं आ रहा।
आंकड़े बताते हैं कि 15 में से जिले के छह ब्लाकों में तो महिलाओं की भागीदारी दो फीसदी से भी कम है। यह स्थिति इसलिए है क्योंकि कामों के लिए महिलाओं को जागरूक और प्रेरित करने की जिले के सरकारी तंत्र ने कभी जरूरत नहीं समझी। पिछले दिनों बरेली आए मनरेगा के डायरेक्टर के सामने ग्राम प्रधानों और रोजगार सेवकों की वर्कशाप में आए सुझाव में यही बात उभरकर सामने आई थी कि अफसर गांव में जाकर महिला प्रधानों से सीधे जाने के बजाय उनके पति से ही बात करते हैं। सीडीओ शिवसहाय अवस्थी को उम्मीद है कि नई रणनीति से सार्थक नतीजे सामने आएंगे। वह कहते हैं कि एक्शन प्लान बनाकर मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
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जिले में यह है स्थिति
मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी- 3.66 फीसदी।
ब्लाकवार स्थिति:- शेरगढ़- 1.78 फीसदी, बहेड़ी- 1.58, आलमपुर जाफराबाद- 1.79, बिथरीचैनपुर- 1.83, भदपुरा- 1.89, भुता- 1.97, रामनगर- 2.57, मीरगंज- 2.67, रिछा- 2.80, भोजीपुरा- 2.85, फरीदपुर- 2.97, मझगवां- 3.03, नवाबगंज- 6.30, क्यारा- 6.87, फतेहगंज पश्चिमी- 7.06 फीसदी।