बरेली। विकास कार्यों के नाम पर घोटाले में फंसे रामनगर ब्लॉक के फुन्नदनगर ग्राम प्रधान महेंद्र पाल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डीएम ने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। जांच के दौरान डीपीआरओ ने बड़े पैमाने पर घपलेबाजी पकड़ी थी। डीपीआरओ ने जब पत्र जारी कर प्रधान से जवाब मांगा तो उसने उत्तर भी नहीं दिया था। इसके बाद प्रशासन ने प्रधान के खिलाफ एक्शन लिया।
प्रधान महेंद्र पाल के खिलाफ कई गंभीर शिकायतों की जांच डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने की थी। जांच में सामने आया कि प्रधान ने प्राइमरी और जूनियर स्कूलों की बाउंड्री का मानक के अनुरूप निर्माण नहीं कराया। अंबेडकर विकास योजना के तहत पूर्व में बनी सीसी रोड और नाली पर ही वर्ष 2016-17 में दोबारा खड़ंजा और नाली का निर्माण कराकर 112500 रुपये का दुरुपयोग किया। चतुर्थ राज्य वित्त से कार्यों के बारे में यह रिकार्ड दर्शाया ही नहीं गया कि किस जगह पर सीसी या नाली बनाई गई है और कहां-कहां पर हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर हुए हैं। जांच में सामने आया कि इस साल ग्राम प्रधान ने गांव में कोई विकास कार्य ही नहीं कराया। इन आरोपों का जवाब न देने पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज कर दिया है।
गबन में फंसे प्रधान और सेक्रेटरी
मीरगंज ब्लॉक ग्राम पंचायत धंतिया में स्वच्छ भारत मिशन में 3676399 रुपये से 315 शौचालय बनवाने के सापेक्ष 3456000 रुपये से 288 शौचालयों के निर्माण कराकर रुपये व्यय किए गए। शेष आहरित की गई 220399 रुपये का सचिव रोहित राव और प्रधान श्रीपाल सिंह ने गबन कर लिया। इसके अलावा गांव में दो दर्जन शौचालयों के निर्माण अधूरे पड़े हैं। पूरे प्रकरण में प्रधान और सचिव दोनों ही 424399 के गबन में दोषी मिले है। डीपीआरओ ने बीडीओ और एडीओ पंचायत को प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे दिए हैं।