कुरारा (हमीरपुर)। सोमवार को मकर संक्रांति का अवकाश था। इसके बाद भी स्कूल को खोला गया और एक मासूम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। उधर, कस्बेमें आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में बच्चों को वैन से लाने व ले जाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।
वैन भी गैस से चलाई जा रही हैं, जिससे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। न तो इन गाड़ियों में स्कूल का नाम ही अंकित नहीं होता है और न इनके पास टैक्सी परमिट है। ज्यादातर में फिटनेस तथा बीमा आदि भी नहीं होता है।
प्राथमिक स्तर के विद्यालयों का सोमवार को जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने मकर संक्रांति का अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन इसके बाद भी स्कूल खोला गया और बच्चे भी प्रतिदिन की भांति स्कूल आए।
ऐसे में दो लोगों की जान चली गई। कस्बे में वैनों में बच्चे लाने ले जाने का रवैया लंबे अरसे से चल रहा है। इन वैन चालकों द्वारा कबाड़ से 20 से 25 हजार रुपये की वैन खरीद ली जाती है तथा बच्चों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।
जबकि प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश हैं कि स्कूली गाड़ियों के समस्त कागजात पूरे होने चाहिए, लेकिन इसके बाद भी स्कूल संचालकों की मनमानी के चलते ये बेरोकटोक चल रही हैं। कस्बा कुरारा में दो दर्जन से अधिक गाड़ियां इसी प्रकार के जोखिम भरा कार्य करती देखी जा सकती हैं।
भूमिगत हुआ स्कूल संचालक
कस्बा निवासी उदय गुप्ता कस्बे के दीपक गेस्ट हाउस की बिल्डिंग में मीराबाई जूनियर हाईस्कूल संचालित करते हैं। घटना के बाद भूमिगत हो गया। मोबाइल फोन भी स्विच आफ मिला। इससे उनका पक्ष नहीं मिल सका। हालांकि बताया जा रहा है कि इस स्कूल में करीब छह वाहन बच्चों को ढोनेेे का काम करते हैं जो आरटीओ विभाग में रजिस्टर्ड नहीं हैं।
झटके से खिड़की खुलने से दूर गिरा संगम
प्रधान प्रतिनिधि रामसजीवन निषाद ने बताया कि घटना के दौरान सात वर्षीय संगम खिड़की किनारे बैठा था जो झटके में खिड़की खुलने से अलग दूर जा गिरा जो अपने पैदल ही करीब 400 मीटर दूर पर घर पहुंच गया। तभी गांव के लोगों को घटना की सूचना मिल सकी।