हापुड़ । ‘प्रदेश के अधिवक्ता 21 मार्च को न्यायालय की अवमानना अधिनियम में संशोधन की मांग पर विरोध दिवस मनाएंगे। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपने-अपने जिले के जिलाधिकारी को सौंपेंगे। ’ यह बात बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार शुक्ला ने शुक्रवार को कचहरी स्थित बार एसोसिएशन के सभागार में पत्रकारों से कही। उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का व्यक्तिगत तौर पर समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि अवमानना अधिनियम में सत्य तथ्य के प्रकटीकरण को अवमानना की श्रेणी से बाहर करने, मामलों का निस्तारण ट्रायल के रूप में करने तथा अधिनियम पीठासीन अधिकारियों पर भी प्रभावी रुप से लागू होने के आशय से इसके संशोधन की मांग की जा रही है। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को दिये जाने वाले स्टाइपेंड का भुगतान अविलंब प्रारंभ करने की मांग करते हुए 27 वर्ष के स्थान पर 30 वर्ष तक के अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड की योजना का लाभ दिए जाने की मांग की। उन्होंने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में केवल उच्च न्यायालय के वकीलों को नियुक्त न करके उसमें अधीनस्थ न्यायालय के अधिवक्ताओं को भी नियुक्त किये जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता कल्याण कोष के लिए एडवोकेट वेलफेयर एक्ट में संशोधन कर बजटीय प्राविधान लागू करने की मांग उठाई। नॉन प्रैक्टिस अधिवक्ताओं के वोट का अधिकार समाप्त करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जो अधिवक्ता प्रतिदिन कचहरी आता है, लेकिन उसके पास काम अथवा चेंबर नहीं है। उसको वोट डालने का पूरा अधिकार है। इससे पूर्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा, सचिव संजय कंसल, पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र सिंह चौहान, अकबर बेग, हरीश शर्मा, उदय सिन्हा, पूर्व सचिव केशव त्यागी, नरेंद्र सिंह मान, उपाध्यक्ष इंतजार अली, रामपाल त्यागी, खालिद खां, योगेश बंसल, सत्यपाल तोमर, यतीश शर्मा, अजीत चौधरी ने फूलमाला पहनाकर अध्यक्ष अजय कुमार शुक्ला का स्वागत किया।