गन्ने की फसल की पानी से बौछार कर सिंचाई किये जाने का प्रथम प्रोजेक्ट मंगलवार को रसूलपुर गांव में चालू हो गया है। इसके लिए सरकार, गन्ना विकास समिति और चीनी मिल से अनुदान दिया जा रहा है। इससे कम लागत से अधिक गन्ने की पैदावार ली जा सकती है।
सिंभावली चीनी मिल के गन्ना विकास प्रबंधक विपिन कुमार बिश्नोई ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से सिंचाई करने पर बहुत कम पानी खर्च होता है तथा बरसात की तरह हर पौधे की सिंचाई बूंद बूंद पानी पड़ने से होती है।
इससे खेत में नमी बनी रहती है तथा ऐसा नहीं होता कि कहीं सिंचाई हो गयी और कहीं ऊंचे नीचे के कारण सिंचाई होने से रह जाए। गन्ने की पैदावार भी करीब 30 प्रतिशत तक अधिक होती है।
उन्होंने बताया कि इसके लगाने के बाद खाद, कीटनाशक आदि के लिए अलग से मजदूर की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि इसकी मशीन ले जुड़े पानी के ड्रम में ही खाद और अन्य दवाइयां डाल दी जाती हैं जिनका बूंद बूंद पानी के साथ संतुलित छिड़काव हो जाता है।
उन्होंने बताया कि रसूलपुर में प्रगतिशील किसान सत्येन्द्र सिंह के खेत में यह प्रोजेक्ट लगाया गया है। एक हेक्टेयर में गन्ने की फसल के लिए इस प्रोजेक्ट को लगाने पर एक लाख तीस हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
इनमें से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 50 हजार रुपये का सरकार से अनुदान मिलता है। जबकि 30 हजार रुपये गन्ना विकास परिषद सिंभावली की ओर से तथा 20 हजार रुपये सिंभावली चीनी मिल की ओर से अनुदान मिला है। बाकी रकम किसान को स्वयं लगानी पड़ी है।
इस प्रोजेक्ट की मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी के प्रबंधक मुकेश विश्व कर्मा,मुकेश राय, धनंजय कुमार,गन्ना विकास अधिकारी दिनेश कुमार और नागेन्द्र सिंह आदि मौजूद थे।