हरदोई। 1971 को हुए भारत-पाक युद्ध में ही नहीं, बल्कि देश की सीमा की रक्षा को चलाए गए हर आपरेशन में जिले की माटी के सपूतों ने अपने खून से भारत माता के मस्तक पर विजय तिलक किया है। आज जब पूरा देश 16 दिसंबर 1971 के पलों को स्मरण कर वीर सपूतों को नमन कर रहा है, तो जिलेवासी भी जान गंवाने वाले इस धरा के सपूतों के प्रति आंखें नम कर गुणगान करते रहे हैं।
जिले के क्र ांतिकारियों व आंदोलनकारियों द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष के लिए किए गए सार्थक प्रयासों का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। आजाद हिंदुस्तान में भी भारत माता की सीमा पर जब जब विपत्ति आई तब तब देश के सपूतों ने जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा की और शहीदों की सूची में अपना नाम तक शामिल करवाने से नहीं चूके हैं। 1971 की लड़ाई में भारत-पाक लड़ाई में पाकिस्तान ने 16 दिसंबर के दिन भारत के जांबाजों के सामने घुटने टेके थे।
पाकिस्तान के अफसरों समेत उनके हजारों की संख्या में सैनिकों ने समर्पण किया, पर इस दौरान तक इस युद्ध में भारत के हजारों जांबाज शहीद हो चुके थे।
पाक ने भारत पर वर्ष 1965 व 71 दो बार हमले किए थे और दोनों ही बार उसे मुंह की खानी पड़ी थी। दोनों जंगों के दौरान फाजिल्का सेक्टर में लड़ी गई लड़ाई में भी जाट, रेजीमेंट, असम राइफल के सैकड़ों जवान शहीद हुए थे। जिले में भी इस युद्ध में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले जांबाजों की याद में लोगों की आंखें नम हो आई। सैनिक कल्याण पुनर्वास कल्याण कार्यालय के मुताबिक जिले के एक सैकड़ा से ज्यादा सिपाहियों ने युद्ध में भाग लिया, जिसमें नौ जांबाज शहीद हुए। जिनकी याद मेें रविवार को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
इसमें राजपूत रेजीमेंट के सिपाही सुदर्शन सिंह, सिपाही रामनरायण सिंह, सिपाही रामचरन, सिपाही जगपाल सिंह, सिपाही मूलचंद, सिपाही मोहम्म्द्दीन, नायक मुनेश्वर दयाल, सिपाही शिवरतन, सिपाही जयराम शामिल हैं।