संडीला (हरदोई)। रेल यात्रियों को सुविधा मुहैया कराने का भले ही विभाग दावा कर रहा हो, पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। प्लेटफार्मों पर गंदगी फैली है, वहीं विश्राम कक्ष में बेंडर दुकान चला रहे हैं। गर्मी के बावजूद प्लेटफार्म नंबर दो पर पंखे नहीं लगे।
कसबे की ओर से स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क ही समस्या बनी हुई है। शुरुआत में गड्डे बने हैं और थोड़ा आगे चलने पर सड़क पर ऊंचे ब्रेकर बना दिए गए हैं। इसके अलावा इस सड़क के दोनों ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी है। प्लेटफार्म दो पानी की टंकियां बनी हुई हैं, पर पानी नहीं निकलता है। एक नंबर प्लेटफार्म पर ही विश्राम कक्ष के पास में बनी पानी की टंकी की टोटी काफी दिनों से खराब है। लोग ट्रेन से उतर कर दौड़ कर पानी की टंकी के पास जाते हैं, पर टोटी खराब देखकर वापस लौट कर ट्रेन पर चढ़ जाते हैं। यात्रियों ने बताया कि प्लेट फार्म नंबर एक पर पंखे तो लटक रहे हैं, पर चलते नहीं है। दो नंबर प्लेटफार्म पर तो पंखे ही नहीं लगाए गए हैं। शौचालय की तो दशा बहुत ही खराब है।
प्लेटफार्म पर जगह जगह गंदगी पसरी पड़ी रहती है। इसके अलावा स्टेशन पर पूछताछ के लिए अलग से कोई काउंटर नहीं है। सहायक स्टेशन मास्टर के कमरे में ही टेलीफोन रखा रहता है। कुछ लोग यहीं पर जाकर गाड़ियों के बारे में पता करते हैं, पर उन्हें यहां से कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। इसके अलावा यहां का फोन कोई रिसीव ही नहीं करता है। उधर, स्टेशन पर एक भी जनरेटर नहीं है। यहां की प्रकाश व्यवस्था बिजली पर निर्भर है, इसलिए ही ज्यादातर रात में स्टेशन पर अंधेरा ही पसरा रहता है। रात के समय स्टेशन पर महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कसबे से स्टेशन की ओर के रास्ते पर एक भी लाइट नहीं लगी है।
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‘वैसे तो स्टेशन पर कोई खास समस्या नहीं है। पानी की टंकियों की टोटियां सही करा दी जाती है, पर लोग इन टोटियों को गलत तरह से खोलकर तोड़ देते हैं। जिन टंकियों की टोटियां खराब हैं, उन्हें सही करा दिया जाएगा। पंखे आदि के लिए अफसरों को बता दिया गया है। रोशनी के लिए स्टेशन पर जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। बहुत पहले एक छोटा जनरेटर आया था, वह खराब हो गया है।’ एचएस श्रीवास्तव, स्टेशन मास्टर