हरदोई। पायका के दो वर्षों में हुए कार्यों का सत्यापन न सिर्फ युवा कल्याण विभाग के लिए आफत बन गया, बल्कि बड़े अफसरों के लिए बवाल-ए-जान हो गया है। हीलाहवाली पर न सिर्फ शासन से जिले के अफसरों के फोन घनघनाने लगे हैं, बल्कि जांच कमेटी के अफसरों के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। 12 बीडीओ और शिक्षा अधिकारियों की हीलाहवाली पर न सिर्फ सीडीओ ने सभी को फटकारा, बल्कि जल्द सत्यापन रिपोर्ट भेजने के निर्देश देते हुए अन्यथा की दशा में कार्रवाई की चेतावनी दी है।
युवा कल्याण विभाग से संचालित होने वाली पायका योजना के सत्यापन की रिपोर्ट शासन की ओर से मांगी गई थी। जिसके बाद जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई गई थी और उसका अध्यक्ष सीडीओ को बनाते हुए यह कहा गया था कि यह अधिकारी किसी दो अफसरों को नामित कर सकते हैं। जिसके बाद जिले में बीईओ और बीडीओ को नामित किया गया था और समय रहते खेल मैदानों की स्थिति, वहां पर लगे उपकरणों की स्थिति व उनकी गुणवत्ता को लेकर रिपोर्ट प्रारूप पर प्रेषित करनी थी, पर काफी समय गुजरने के बाद भी सिर्फ सात ब्लाकों से ही रिपोर्ट प्रेषित की जा सकी है।
भरखनी, शाहाबाद, पिहानी, कोथावां, सुरसा, कछौना व हरपालपुर इसमें शामिल हैं। शेष ब्लाकों के बीडीओ और बीईओ को इस बाबत युवा कल्याण अधिकारी द्वारा रिमाइंडर भी भेजे गए, पर जवाब नहीं मिला। उधर, शासन की ओर से हीलाहवाली पर पुरसाहाल लिए जाने के बाद सीडीओ ने न सिर्फ युवा कल्याण विभाग को आड़े हाथों लिया, बल्कि एक-एक करके बीडीओ और खंड शिक्षा अधिकारियों को भी शिथिलता छोड़कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रेषित करने की चेतावनी दी है। अन्यथा की सूरत में कार्रवाई करने की बात कही है। उधर, इस बाबत जिला युवा कल्याण अधिकारी आरए सैनी का कहना है कि उन्होंने क्रीड़ाश्री उनकी सहूलियत के लिए लगा रखा है, पर जांच रिपोर्ट दूर वह रिमाइंडर का भी जवाब नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद सीडीओ के संज्ञान में यह बात लाई गई हैं। उधर, ब्लाकों पर कुछ ऐसा खेल होने की संभावनाएं बताई जा रही कि वहां बीडीओ और बीईओ को अपने द्वारा सत्यापन न करके रोजगार सेवकों व बीआरसी द्वारा सत्यापन करा रहे, जो किन्ही कारणों से सत्यापन करने का मन नहीं बना पा रहे हैं। कुछ ऐसे ही आरोप खुद क्षेत्रीय युवा कल्याण अफसरों द्वारा लगाए जा रहे हैं।