संडीला(हरदोई)। करोड़ों खर्च होने के बाद बेसिक शिक्षा में सुधार होता नजर नहीं आ रहा। आलम यह है कि शिक्षा सत्र शुरू हुए साढे़ तीन माह बीतने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के दर्जनों विद्यालयों में ताले लटक रहे हैं। इन विद्यालयों की जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों को क ख ग पढ़ाने वाले तक मौजूद नहीं हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में 30 बच्चों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए लेकिन संडीला तहसील के ब्लाक क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते एक शिक्षक के जिम्मे सौ से अधिक बच्चों की पढ़ाई है। तहसील के अंतर्गत कोथावां में 143 प्राथमिक स्कूल में 20 हजार के आसपास बच्चे पंजीकृत हैं। इनको पढ़ाने के लिए मात्र 92 शिक्षक हैं जबकि 46 जूनियर स्कूलों में 4, 620 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी 31 शिक्षकों पर है। यहां 15 जूनियर स्कूलों का अभी तक ताला नही खुला है और 61 प्राथमिक स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे हैं।
संडीला ब्लाक में 146 प्राथमिक स्कूलों 21 हजार बच्चे पंजीकृत हैं और पढ़ाने के लिए 160 शिक्षक ही हैं। 54 जूनियर स्कूलों में पांच हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इनकी जिम्मेदारी 97 शिक्षकों पर है। यहां 23 प्राथमिक और 18 जूनियर स्कूलों में ताला है। अन्य ब्लाकों में दर्जनों स्कूलों का अभी तक ताला ही नहीं खुल पाया है।
एक-एक शिक्षक को तीन-तीन स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी दे दी जाती है। लेकिन यह जिम्मेदारी केवल कागजों तक ही सीमित रहती है। यही हाल अन्य ब्लाकाें का भी है जहां दर्जनों स्कूलों में ताला लटक रहा है।
खंड शिक्षा अधिकारी रमेश चन्द्रा ने बताया कि शिक्षकों की पहले से ही कमी है। ऊपर से शिक्षकों के गैर जनपद स्थानांतरण हो जाने से काफी संख्या में स्कूल बंद हो गये हैं।