अतरौली। किताबों में पढ़ा था कि गांव में यह होता है, वह होता है, किंतु आज हकीकत में गांव को देख लिया। अपने अनुभव बताते हुए गांव की यादें अपने साथ लेकर पांचों ट्रेनी आईएएस गुरुवार को विदा हो गए। वे अपने साथ में गांव में मिली आत्मीयता, सहजता व प्रकृति का आनंद के साथ ही सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत को ले गए हैं।
उनका कहना है कि यदि गांव को पर्याप्त मात्रा में बिजली मिल जाए, तो गांव की तस्वीर ही बदल जाएगी। विदा होते हुए ट्रेनी आईएएस दमन सिंह ने कहा कि अतरौली में बहुत कुछ देखने को मिला है। पांचों आईएएस पंजाब, दिल्ली, केरल व आंध्र प्रदेश के शहरी परिवेश से ताल्लुक रखते हैं। पहली बार उनको गांव की हकीकत देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि गांव में एक आत्मीयता, अपनापन व सहज भाव लोगों में आसानी से मिलता है। ट्रेनी आईएएस अनीश का कहना है कि गांव का जीवन प्रकृति के नजदीक रहता है। ट्रेनी आईएएस शिशांका ने कहा कि वे जहां भी तैनात होंगी, वहां पर गांव के लोगों की समस्याओं को सदैव प्राथमिकता देंगी। गौरव ने कहा कि उनकी ट्रेनिंग में गांव की व्यवस्था को जानना बहुत अहम अंश है।
पांचों आईएएस ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि यदि गांव को पर्याप्त बिजली मिल जाए तो सभी प्रकार की शहरी सुविधाएं गांव में स्वत: तैयार हो जाएंगी। गांव का आसान जीवन शहरी लोगों को भी आकर्षित करने लगेगा। पंचायतों के निर्णयों में अधिक भागीदारी के लिए पारदर्शिता लाने पर कार्य करने का निर्णय ट्रेनी आईएएस ने लिया है। हिंदी न बोल पाने वाली चित्रा भी विदाई के समय अपनी भावुकता को रोक नहीं सकी। विदाई के समय ट्रेनी आईएएस को रोटी पकाकर खिलाने वाले सभी रसोइया, हेड टीचर कृष्ण कुमार चतुर्वेदी समेत कई लोग भावुक हो गए। थाना इंचार्ज उत्तम सिंह, बीईओ दिनेश चंद्र जोशी, बीडीओ एके सक्सेना, सीएचसी अधीक्षक डा. सुशील, बैंक के शाखा प्रबंधक मिश्रा समेत सभी जिम्मेदार अफसरों ने ट्रेनी आईएएस को गांव में लागू होने वाली योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी। एसडीएम जीसी श्रीवास्तव ने सभी को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई।