पिहानी (हरदोई)। करावां गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अष्टावक्र ने कहा कि भगवान के लिए तन नहीं, मन महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में भगवान मौजूद हैं, पर हम उसे अपने भीतर तलाश करने के बजाय इधर-उधर ढूंढते हैं।
वृंदावन के अष्टावक्र ने समझाया कि ईश्वर को खोजने को हम तरह-तरह के प्रयास करते हैं, पर उसे नहीं पाते। कहते हैं कि वह सब जगह, पर फिर भी हमें क्यों नहीं दिखाई देता। गौर करना चाहिए कि ईश्वर तो हैं, पर हम उसे तलाश करने को जो रास्ता चुनते हैं वहीं गलत होता है। ईश्वर को धन और वैभव से नहीं पाया जा सकता। उसे पाने को प्रेम की राह चुनें। प्रेम करने के अर्थ बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि प्राणिमात्र, जड़ चेतन और आत्मा से प्रेम करना चाहिए। ईश्वर को पाने के लिए जंगल में जाने, धूनी रमाने और धन-वैभव नष्ट करने की जरूरत नहीं है, जब वह सर्वत्र है तो हमारे अंदर भी होगा।
अपनी आत्मा की आवाज सुनें। जब हम बोलते हैं, चलते हैं, काम करते हैं और शुभ कार्य करने की प्रेरणा होती है, तो सोचे यह कहां से होती है। किसी को कष्ट पहुंचाने का विचार आने पर हमें अंदर ही कोई रोकता है। पहचाने कि वह कौन है। वह अपने अंदर मौजूद ईश्वर ही है। उसे अपने अंदर ही प्राप्त किया जा सकता है। भागवत कथा श्रवण के लाभ गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इससे मन शुद्ध होता है और अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान अन्नू गुप्ता, अवधेश कुमार, जय श्याम गुप्ता व शशांक आदि ने व्यवस्थाएं देखीं।