टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:44 AM IST
डॉक्टर की फाइल दिखाते सत्यप्रकाश
नोटबंदी औरैया सत्यप्रकाश के लिए आफत बनकर आई है। बीमार मां-बाप के महंगे इलाज से जूझ रहे सत्यप्रकाश के बेटे को भी पीलिया हो गया। ऐसे में वह तीनों का इलाज करवा रहा है, लेकिन रुपये घर में नहीं है। डाक्टरों की फाइल लेकर बैंक के चक्कर काट रहा है, और रुपये निकालने के लिए गुहार लगा रहा है।
कखावतू निवासी सत्यप्रकाश मिश्रा के पिता शिवनारायन मिश्रा सांस और दमा की बीमारी से ग्रसित हैं। इसके अलावा सर्वाइकल बीमारी भी है। जबकि मां सत्यवती को स्नोफीलिया है। दोनों का इलाज कानपुर से चल रहा है। नोटबंदी से अचानक ही घर में रुपयों की किल्लत आ गई। घर के चूल्हे जलाने के लिए रुपये नहीं है, ऐसे में दवाएं कैसे मिले। सत्यप्रकाश सब काम छोड़कर बैंक की लाइन में लग रहे हैं तो बैंक दो से चार हजार रुपये पकड़ा रही है। मंहगी दवाएं और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था, कि अचानक बेटे प्रतीक को पीलिया हो गया। तीनों की महंगी दवाएं खरीदने के लिए सत्यप्रकाश के पास रुपये नहीं है। ऐसे में वह डाक्टरों की फाइल लेकर बैंक के चक्कर काट रहा है। सत्यप्रकाश ने डीएम व अग्रणी बैंक प्रबंधक से इलाज के लिए रुपये दिलाए जाने की गुहार लगाई है।