हवालात में जहर खाने वाला कंपाउंडर अंकित कटियार।
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कानपुर साउथ। पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर एक कंपाउंडर ने गुरुवार को बर्रा थाने की हवालात में जहर खाकर जान देने की कोशिश की। चौबेपुर पुलिस उसे फर्जी स्मार्ट कार्ड के मामले में पूछताछ के लिए बर्रा थाने लेकर पहुंची थी। पुलिस ने कंपाउंडर को आनन-फानन अस्पताल पहुंचाया। परिजनों ने चौबेपुर पुलिस पर प्रताड़ना और केस से नाम हटाने के लिए रुपये मांगने का आरोप लगाया है।
के ब्लाक बर्रा विश्वबैंक निवासी अंकित कटियार उर्फ राज का बर्रा जे ब्लाॅक में मेडिकल स्टोर है। वह रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (आरएमपी) है और मेडिकल स्टोर में ही मरीजों को देखता है। भाई शुभम ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे चौबेपुर थाने के एसआई विश्वनाथ मिश्र एक सिपाही के साथ घर आए और अंकित को पूछताछ के बहाने बर्रा थाने ले गए। आरोप है कि हवालात में डालकर अंकित को प्रताड़ित किया गया। अंकित को छोड़ने और केस से नाम हटाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगे गए। दोपहर में अंकित ने हवालात में ही जहर खा लिया। इसके बाद पुलिस वाले उसे एक निजी अस्पताल ले गए। यहां से उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। अस्पताल में पुलिस और परिजनों के बीच तकरार भी हुई। बर्रा एसओ तुलसीराम यादव फोर्स के साथ पहुंचे व परिजनों को शांत कराया।
यह था मामला
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बीमा योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों के इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड जारी हुए थे। चौबेपुर के सद्गुरु हास्पिटल में 17 अगस्त 2015 को कुछ मरीजों के पास फर्जी स्मार्ट कार्ड मिले थे। अस्पताल प्रशासन ने शिवराजपुर के मक्कापुरवा निवासी राम कृपाल को पकड़कर पुलिस को सौंपा था। पुलिस ने हास्पिटल के निदेशक डॉ. नीलेश कटियार पर धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया था। राम कृपाल से पूछताछ के बाद बर्रा के शैलेंद्र भदौरिया को पकड़ा गया। तब शैलेंद्र ने पुलिस को राज कटियार, लोकेंद्र सचान औैर राहुल को गैंग का सदस्य बताता था। पुलिस ने विवेचना में इन तीनों के नामों का खुलासा किया था। चौबेपुर एसओ राकेश यादव ने बताया कि अंकित कटियार को इसी मामले में हिरासत में लिया था। पुलिस अंकित को बर्रा थाने में सौंपकर दूसरे आरोपियों की तलाश में चली गई। तभी उसने जहर खा लिया।