बरनाहल। करीब 20 सालों से नीलगायों के आतंक से परेशान 40 ग्रामों के किसानों ने लोकसभा चुनाव और पोलियो खुराक का बहिष्कार करने का सामूहिक फैसला लिया है। किसानों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से शिकायत करने के बाद भी कोई इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। खेत में खड़ी फसलें नीलगाय चट कर जाती हैं और ऐसे में किसान कंगाल होते जा रहे हैं।
सोमवार को ग्राम अटा हरैना के प्राथमिक स्कूल में क्षेत्र के 40 ग्रामों के किसानों ने बैठक कर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कोसा। किसान अजयपाल सिंह ने कहा कि 21 जुलाई 2012 को कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के समक्ष किसानों ने इस समस्या को उठाया था और उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही नीलगायों को पकड़वाकर समस्या से निजात दिलाई जाएगी लेकिन इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की गई है।
किसान हरी सिंह ने कहा कि तमाम मांगों के बाद भी शासन-प्रशासन हमारी समस्या की अनदेखी कर रहा है। किसान जान जोखिम में डालकर रात-रात भर जागकर फसलों की रखवाली करने को विवश हैं। इसके बावजूद जरा सा मौका मिलते ही नीलगाय फसलों को चौपट कर जाती हैं। किसानों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि अब लोकसभा चुनाव और पोलियो खुराक का बहिष्कार किया जाएगा। किसान अपना फैसला तभी बदलेंगे जब उन्हें नीलगाय और आवारा गायों से निजात दिलाई जाएगी।
बैठक में बेलाहार, चापरी, अब्दुलनवीपुर, नगला महाराम, सुनूपुर, बहशी, कनिकपुर, मिर्रा, नवाटेढ़ा ग्रामों के किसानों ने हिस्सा लिया। प्रधान साहब सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलेदार सिंह, सत्यवीर सिंह, धर्मवीर सिंह, सुल्तान सिंह, हरिओम, सुभाष चंद्र, शिवचरनलाल, विक्रम सिंह, वारिश अली, ब्रजेंद्र सिंह, रामा, सोनी ने संबोधित किया।
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दो किसानों का रखवाली करते समय हो चुका अपहरण
बैठक में किसानों ने नीलगायों से फसल को बचाने के लिए आने वाली परेशानियों को उठाया। किसानों ने कहा कि छह माह पूर्व नीलगाय से फसलों की सुरक्षा करने के लिए खेतों पर गए बेलाहार के दो किसानों का अपहरण कर लिया गया था। इन स्थितियों में रात में फसलों की रखवाली करना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है।
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और किसान भी विरोध में आएंगे आगे
कोसमा क्षेत्र के 20 से अधिक ग्रामों के किसान भी नीलगाय की समस्या को लेकर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर चुके हैं। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत का कहना था कि इस मुद्दे को लेकर अब किसान संगठित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में और गांवों के किसान भी विरोध प्रदर्शन करने को आगे आएंगे।