मैनपुरी। निर्मल भारत अभियान में मनरेगा रोड़ा बन रहा है। आलम यह है कि वित्तीय वर्ष 2013-14 के शौचालयों का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है। निर्मल भारत अभियान के तहत तो शौचालय निर्माण की धनराशि मिली है लेकिन मनरेगा से धनराशि ही नहीं आई। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के घरों में शौचालयों का निर्माण पूरा होते नजर नहीं आ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच प्रथा को समाप्त करने के लिए वित्तीय वर्ष 2012-13 से निर्मल भारत अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में शौचालय निर्माण की धनाशि 2200 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दी गई। अभियान में 4600 रुपये निर्मल भारत अभियान से और 4500 रुपये मनरेगा से देने का प्रावधान था। 900 रुपये लाभार्थी को वहन करने होते हें। 2013-14 से योजना में मनरेगा रोड़ा बन गई। योजना के तहत अब तक इस वित्तीय वर्ष में 18487 शौचालय बनाने का लक्ष्य दिया गया। एनबीए में 12306 शौचालयों के लिए पैसा दिया। जबकि मनरेगा से लगभग 4900 का ही पैसा मिल सका है। ऐसे में शौचालयों का निर्माण पूरा होते नजर नहीं आ रहा है।
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किशनी में हालत और खराब
किशनी। विकास खंड क्षेत्र में स्थिति और अधिक खराब है। ब्लाक में चार लोहिया गांव का चयन वित्तीय वर्ष 2013-14 में किया गया। इन गांवों में से सठिगवां में 589, तरिहा में 328, नगला खुन्नी में 88 और हिरौली में 397 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया। इनमें से अब तक सठिगवां और तरिहा में 250- 250 पर काम शुरू हुआ वहीं हिरौली में 220 पर काम शुरू हुआ। मनरेगा से धनराशि न मिलने के चलते सभी शौचालय अधूरे हैं।
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कैसे मिलती है धनराशि
वित्तीय वर्ष 2012-13 में मनरेगा की धनराशि के पैसा को ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव चेक काटकर देते थे। बाद में इस धनराशि के लिए पहले फाइल तैयार करने, उसके बाद बीडीओ को दिए गए कोड के माध्यम से ऑन लाइन धनराशि की मांग लखनऊ करने की प्रक्रिया हुई। इस धनराशि से सामग्री और मजदूरों का पैसा दिया जाता है।