मऊ। जिले में चार मौतों की पुष्टि जापानी इंसेफ्लाइटिस से होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को सांप सूंघ गया है। गोरखपुर मेडिकल कालेज से पुष्टि रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ ने भी स्वीकार किया है। बताया कि ऐसा हुआ है लेकिन बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में तेरह गांवों में बीमारी के केस मिले थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग नहीं जाग सका। गांवाें में दवा छिड़काव सहित बीमारियों से बचाव के चाहे लाख दावे किए जाएं लेकिन औपचारिकता भी नहीं निभाई जाती। जबकि इसके नाम पर धनराशि अलग से भेजा जाता है।
जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) का कहर जिले में पिछले कई वर्ष से है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य महकमा लीपापोती कर रहा था। इस वर्ष भी जेई से मौत बताने में विभाग कतरा रहा था। लेकिन गोरखपुर मेडिकल कालेज से आई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में अब तक जिले में चार मौत की पुष्टि हो चुकी है। इससे विभाग में हड़कंप मचा है। आंकड़ों पर गौर करें तो रतनपुरा ब्लाक के हलधरपुर, फतहपुर मंडाव ब्लाक के मिश्रौली, बड़रांव ब्लाक के अतरसांवा और अगस्त में दोहरीघाट ब्लाक के कादीपुर के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। अभी तक बुखार या कोई अन्य बहाना बनाने वाले विभागीय चिकित्सकों के आंखों की पट्टी भी अब खुल गई है। वर्ष 2011 में बीमारी के 13 गांवों में केस मिले थे। इनमें चकभीकमपुर, अनवलपुर, बड़ागांव, मुहम्मद झोंटपुर, डगौली की मठिया, चोरपाखुर्द, सलेमपुर, कहिनौर, रानीपुर ब्लाक का करजौली गांव, चक्कीमुसाडोही, चकरा, मिश्रौली आदि गांव हैं। बावजूद इसके रोकथाम के इंतजाम नहीं किए गए। मुख्य चिकित्साधिकारी नंदलाल यादव का कहना है प्रभावित गांवों में टीकाकरण हो चुका है। प्रभावित परिवार के हर सदस्यों की स्लाइड बनाई जा रही है। फागिंग मशीनों से छिड़काव भी हो रहा है। इसके अलावा टीयूटी जागरूकता में लगे हैं। साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया है। यह टीम सीएचसी केंद्रों एवं जिला मुख्यालय पर तैनात है।
जापानी इंसेफ्लाइटिस के लक्षण
मऊ। जेई के लक्षण क्यूलेक्टस विस्नोई मच्छर के काटने के बाद चार से 14 दिन के बीच दिखाई देते हैं। इसमें व्यक्ति को तेज सिर दर्द होता है और अत्यधिक बुखार आता है। शरीर में ऐंठन, बेहोशी, झटके आना, गर्दन में जकड़न और लकवा की भी शिकायत होना इसका प्रमुख लक्षण होता है। समय से इसका इलाज नहीं हुआ तो इससे मौत भी हो जाती है।
बीमारी से घरेलू बचाव के उपाय
मऊ। घरेलू बचाव के नाम पर जलजमाव वाले स्थानों, नालियों में मिट्टी के तेल और जले हुए मोबिल को डाला जा सकता है। सहायक मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि लोगों को अपने घरों के कूलर और फ्रिज का जमा पानी भी बदलते रहना चाहिए। अन्यथा इन स्थानों पर भी लार्वा इकट्ठा हो सकते हैं।