मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति राम नाईक ने मेधावियों को व्यक्तित्व विकास के चार मंत्र दिए। युवाओं में जोश भरा कि वह दुनिया के सबसे युवा देश के नागरिक हैं। देश को आगे ले जाना की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
कुलाधिपति ने कहा कि देश में 700 विश्वविद्यालय हैं। 35 हजार कॉलेज और करीब दो करोड़ से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। फिर भी विश्व के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में अपना एक भी नहीं है। नालंदा और तक्षशिला विवि का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में आवागमन के लिए न तो रेल थी और न ही जहाज। फिर भी विदेशों से लोग पढ़ने आते थे। मेरठ के विषय में कहा यह ऐतिहासिक नगरी है। 1857 क्रांति यहीं से शुरू हुई थी।
अच्छे काम की तारीफ करें
राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं से कहा कि सफल होने के लिए व्यक्तित्व विकास जरूरी है। इसके लिए चार टिप्स दिए। पहले टिप्स में कहा कि हमेशा हंसते रहिए। साथ ही सलाह दी कि गलत मौके पर न हंसे। उदाहरण देकर बताया कि माता-पिता के झगड़े के दौरान न हंसे, वरना अंजाम बुरा होगा। यह सुनकर प्रेक्षागृह में ठहाके गूंज गए। दूसरे टिप्स में कहा कि गुण ग्रहण करना और उसका वर्णन करना सीखिए। मां ने सब्जी अच्छी बनाई है तो उसकी तारीफ कीजिए। तीसरे टिप्स में कहा कि किसी की अवमानना मत कीजिए। चौथे टिप्स में कहा जो भी काम करें उसमें यह सोचे कि इसे मैं सबसे अच्छा कैसे करूं।
मैं भाग्यवान नहीं था
कुलाधिपति ने कहा कि उन्होंने बीकॉम और एलएलबी की। लेकिन नौकरी के दौरान छुट्टी नहीं मिलने की वजह से वह दीक्षांत समारोह में भाग नहीं ले सके। यह बात समय कम होने की वजह से सभी छात्रों को मेडल नहीं दे पाने पर कुलाधिपति ने कही।