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सिटीजन फोरम के जरिए बचाई जाएगी गौरैया

Noida Updated Thu, 21 Mar 2013 05:30 AM IST
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नोएडा। विश्व गौरैया दिवस के मौके पर सिटीजन फोरम की शुरुआत की गई है। देश की तीन बड़ी संस्थाओं ने एक मंच पर आकर इसकी शुरुआत की। इसके तहत घरेलू चिड़िया गौरैया को बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम किया जाएगा, जबकि स्कूली छात्रों को जानकारियां दी जाएंगी। ओखला पक्षी विहार में इस कार्यक्रम की शुरुआत फिक्की की अध्यक्ष ने की। वहीं, बच्चों के साथ नेचर कैंप आयोजित हुआ।
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इंडियन नेशनल हेरिटेज एंड कल्चर काउंसिल, अर्थ वाच संस्था और एचएसबीसी बैंक ने एक मंच पर आकर गौरैया को बचाने के लिए सिटीजन फोरम की शुरुआत की। इस मौके पर फिक्की की अध्यक्ष कल्पना किदवई ने कार्यक्रम की शुरुआत की। वनाधिकारी बी. प्रभाकर ने बताया कि सिटीजन फोरम में लोगों को चिड़िया और अन्य पक्षियों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसमें स्कूलों से लेकर आवासीय सोसाइटी तक काम करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, अर्बन क्षेत्रों में वैटलैंड को विकसित करने पर जोर दिया गया है, जिससे पक्षियों को और अधिक सुरक्षा दी जा सके।
दूसरी तरफ ओखला पक्षी विहार के रेंजर जेएम बनर्जी ने नेचर कैंप का आयोजन किया। इसमें स्कूली छात्रों को गौरैया के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही कृत्रिम घोंसलों के बारे में बच्चों को बताया गया। गौरैया घरेलू चिड़िया है, इसलिए अपने घरों में कौन-कौन से काम किए जाएं, जिससे इनकी घटती संख्या को रोका जा सके। उन्होंने इस मौके पर गौरैया के अलग-अलग प्रदेश में पुकारे जाने वाले नामों की जानकारी भी बच्चों को दी। बनर्जी ने बताया कि तमिल और मलयालम में गौरैया को कुरुवी, तेलुगू में पिच्युका, कन्नड़ में गुब्बाच्ची, गुजराती में चकली, मराठी में चिमानी, पंजाबी में चिड़ी, बांग्ला में चराई पाखी, उड़िया में घर चटिया, सिंधी में झिरकी और कश्मीरी में चेर कहा जाता है। कहीं-कहीं पर इसे गुड़रिया, गौरेलिया, खुसरा चिरई या बांहन चिरई भी बुलाते हैं।
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