सीतापुर। गांजर की धरती पर लंबे अर्से से चल रहे अवैध बालू खनन पर वैसे तो अफसर मामूली कार्रवाइयों के सिवा, चुप्पी साधे नजर आते रहे हैं। शनिवार को सकरन क्षेत्र की चौका नदी के कछारों में हो रहे खनन को रोकने में एक अफसर का रवैया बेहद ढुलमुल रहा। इस रवैए ने साबित कर दिया है कि यहां के अफसरों में दुर्गा जैसी शक्ति नहीं है! उनकी चुप्पी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वह फैसले लेने में खुदमुख्तार नहीं हैं, बल्कि उन्हें किसी के इशारे का इंतजार रहता है।
मालूम हो कि जिले के तकरीबन डेढ़ दर्जन स्थानों पर रसूखदार दबंगों द्वारा खुलेआम बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। सिर्फ गाजर ही नहीं जिले के अटरिया, संदना, नैमिषारण्य आदि क्षेत्रों में भी खनन हो रहा है। तमाम शिकायतों के बाद भी अफसर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जब सकरन में अवैध बालू खनन पर ग्रामीणों ने बवाल शुरू कर दिया और करीब चौदह ट्रक पकड़ लिए गए। तब एक अफसर के पास एक ‘माननीय’ का फोन पहुंचा। उन ‘माननीय’ ने अफसर को निर्देश दिया कि फौरन मौके पर जाकर ग्रामीणों को संभालों और मामले को शांत करो। इस बात से यही प्रतीत होता है कि अवैध खनन पर काबिज दबंगों पर अंकुश लगाना अफसरों के बूते का काम नहीं है।
ये हैं जिले के अवैध खनन के अड्डे
जिले में करीब एक दर्जन स्थानों पर अवैध खनन के अड्डे होने बताए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि जिले के गांजरी क्षेत्र में मोहाला घाट, बंगरहापुरवा, मेउढ़ी सेलवा, गोलोक कोरण, अटरिया क्षेत्र के अकबरपुर, हलीमपुर, खानीपुर, अंबरपुर, संदना क्षेत्र में तेरवा घाट, ककरघटा, नैमिष क्षेत्र में गोमती के किनारे, लहरपुर तहसील क्षेत्र में करीब दस स्थानों पर अवैध खनन होता है। हालांकि इस दौरान बारिश व रास्ता न होने के कारण कई स्थानों पर पहले से ही खनन बंद था। लेकिन शनिवार को सकरन इलाके में हुई घटना के बाद भी कई अन्य स्थानों पर खनन जारी रहा।