बागेश्वर। कुमाऊं की शांत वादियों में अपराधों में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। बीते एक दशक में आबादी में तो इजाफा हुआ, लेकिन पुलिस व्यवस्था बढ़ने की बजाए और घट गई। जिले की कोतवाली, कोतवाली, थानों और चौकियों में फोर्स की व्यवस्था का मानक दशकों पुराना है। विडंबना यह है कि उस मानक के आधार पर भी पदों पर तैनाती नहीं है। यहां 35 कांस्टेबल और तीन एसआई के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। चौकियों में नाममात्र के सिपाही तैनात हैं।
कोतवाली, थाना और चौकियों में पुलिस बल की तैनाती के लिए वर्षों पूर्व बनाए गए मानक बढ़ती जनसंख्या और विस्तृत भौगोलिक स्थिति के आगे बौने साबित हो रहे हैं। पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के बावजूद मानकों में तब्दीली नहीं होने से कई बार पुलिस प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था खड़ी हो जाती है। यही कारण है सड़क से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कई बार कानून व्यवस्था खड़ी हो जाती है। मालूम हो कि सदियों पूर्व बनाए गए मानकों के अनुसार कोतवाली में 68 पुलिस कर्मी होने चाहिए। इनमें से एक कोतवाल, चार एसआई, चार हैड कांस्टेबल और शेष कांस्टेबल शामिल हैं। पुराने मानक के अनुसार वर्तमान में यहां 11 कांस्टेबल के पद खाली हैं। पहले की अपेक्षा अब शहर का क्षेत्र भी बढ़ गया है। आबादी में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। थानों में एक एसओ, दो एसआई, दो हेड कांस्टेबल और 23 कांस्टेबलों का मानक बना है। कपकोट थाने के दो सिपाही शामा रिपोर्टिंग चौकी में भेजे गए हैं। कपकोट ब्लाक का पूरा भाग थाने के अंतर्गत ही आता है। इसी तरह रिपोर्टिंग चौकियों में एक एसआई, एक हेड कांस्टेबल और आठ कांस्टेबल होने चाहिए। वहां भी मानक के अनुसार कहीं दो तो कहीं चार पुलिसकर्मी तैनात हैं।
मालूम हो थानों में तैनात पुलिसकर्मियों की आठ-आठ घंटे की ड्यूटी होती है। शिफ्ट के अनुसार यदि जीडी लेखन में लगे छह कर्मियों को कम कर दिया जाए तो एक दिन में सिर्फ छह पुलिसकर्मी ही ड्यूटी के लिए बचे हैं। उन्हीं पर कानून व्यवस्था का पूरा दारोमदार रहता है। पर्याप्त पुलिस बल नहीं होने के कारण अवैध शराब और मादक पदार्थों की तस्करी में लगे तत्वों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
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जिले के हालात
कोतवाली : एक (बागेश्वर)
थाना : तीन (कपकोट, बैजनाथ और झिरौली)
चौकियां : चार (कौसानी, रीमा, डंगोली, कमेड़ीदेवी), इसके अलावा शामा में अस्थाई पुलिस चौकी।
यहां नहीं हैं भवन ====
जिले की सभी चौकियां किराए के मकानों में चल रही हैं। कपकोट में थाना भवन अभी निर्माणाधीन है। हां, बागेश्वर कोतवाली, बैजनाथ और झिरौली थाने के अपने भवन हैं।
कौसानी चौकी को मिलेगा थाने का दर्जा: एसपी
पुलिस कप्तान एनएस नपलच्याल ने बताया कौसानी चौकी को थाने में शीघ्र अपग्रेड हो किया जाएगा। थाने का कितना एरिया शामिल होगा इसका परिसीमन कराकर उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। डंगोली और रीमा पुलिस चौकियों के पक्के भवन के लिए जमीन तलाश कर प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। वन अधिनियम की पूर्ण स्वीकृति मिलने पर भवनों का निर्माण भी शुरू होगा। उन्होंने कहा रिक्त पदों का मामला उच्चाधिकारियाें के संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जितनी फोर्स यहां है उससे कानून व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है।