पिथौरागढ़। बड़ावे के लोग शहीद नंद किशोर जोशी की उपेक्षा से दुखी है। यहां के नागरिकों ने बाकायदा बैठक कर इस अपेक्षा पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है।
गुरमक (सूडान) में संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के वाहनों को एस्कोर्ट करते वक्त 9 अप्रैल को विद्रोही गुट के हमले में 9 मैकेनाइज्ड इनफैंट्री बटालियन और 6 मैहर रेजीमेंट के नंदकिशोर जोशी सहित पांच सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए थे। गांव वालों का आरोप है कि 11 अप्रैल को रामेश्वर घाट में अंतिम संस्कार के वक्त भी सरकारी अमले ने बस रस्म अदा की थी। अंत्येष्टि में एक भी बड़ा जन प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। वहीं प्रशासन की ओर से भी तहसीलदार और पुलिस के एक दरोगा ही उपस्थित थे।
सामाजिक कार्यकर्ता जीवन चंद्र जोशी की अध्यक्षता और सुभाष चंद्र जोशी के संचालन में हुई बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि शहीद का पीपल पानी भी हो चुका है। लेकिन अब तक परिजन प्रदेश सरकार की ओर से संवेदना के दो बोल को तरस गए हैं। वहीं उप्र की सरकार ने वहां के शहीदों के घर जाकर सांत्वना देने के साथ परिजनों को 20 लाख रुपये देने का ऐलान भी किया। इस दोहरे रवैये से गुस्साए लोगों ने इसे शहादत का अपमान करार दिया है। बैठक में चिंतामणि जोशी, केदार जोशी, देवीदत्त जोशी, खिलानंद जोशी, नंदन किशोर जोशी, गोविंद बल्लभ जोशी, देवकीनंदन जोशी आदि मौजूद थे।