डीडीहाट। एक ओर कुमाऊं के तमाम इलाकों में लोग होली के रंग में मस्त होने लगे हैं। नाच, गाना होने लगा है। रंग खेला जा रहा है। वहीं डीडीहाट तहसील के 120 गांव ऐसे हैं जहां लोग न तो होली गाते हैं और न ही रंग खेलते हैं। इन गांवों में होली के त्योहार को लेकर कोई उत्साह और उमंग नहीं रहता।
इन गांवों में होली न मनाए जाने का लोग कोई स्पष्ट कारण तो नहीं जानते लेकिन नई पीढ़ी ने होली मनाने की पहल भी नहीं की। दूनाकोट घाटी के 40 गांवों, आठाबीसी पट्टी के 35 गांवों और बोरागांव घाटी के 45 गांवों में होली नहीं मनाई जाती। बोरागांव के 90 वर्षीय चंचल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी होली नहीं खेली। रंग, गुलाल लगाने के बाद कैसा आभास होता है इसे वह नहीं जानते। वह अपने बुजुर्गों से सुनी बातों के आधार पर बताते हैं कि अतीत में बोरागांव के लोग मथुरा से होली की चीर लेकर आए थे। चीर को रात में मंदिर में रखा गया था वहीं से इसकी चोरी हो गई। इसे बेहद अशुभ मानते हुए लोगों ने होली के आयोजन का इरादा ही छोड़ दिया।
जौरासी के चंचल सिंह बोरा का इस मामले में अलग तर्क है। वह कहते हैं कि जिन गांवों में आठूं का त्योहार मनाया जाता है वहां पर होली नहीं मनाई जाती। इन सभी गांवों में आठूं का त्योहार लोग धूमधाम से मनाते हैं। बताया गया है कि नई पीढ़ी ने भी कभी होली का त्योहार मनाने की पहल नहीं की।