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मेले को रोजगार से जोड़ेंगे : बहुगुणा

Tehri Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
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नरेंद्रनगर (टिहरी)। सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी धार्मिक और पर्यटन मेला धार्मिक तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया। आठ दिवसीय मेले का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि सरकार धार्मिक और पर्यटन विकास मेले को रोजगार से जोड़कर दुर्गम क्षेत्रों के विकास को कृतसंकल्प है। उन्होंने आपदा प्रभावित गांव डौर, कंडारगांव और भैंसर्क के विस्थापन का आश्वासन भी दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा की सुविधा देना सरकार की प्राथमिकता में है। केंद्र सरकार से दैवीय आपदा मद में डेढ़ सौ करोड़ और विकास कार्यों को गति देने के लिए मिले 15 सौ करोड़ पर्वतीय क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक सुबोध उनियाल की 99 प्रतिशत मांगें पूरी करने की भी घोषणा की। इस मौके पर गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की निविदा इसी माह जारी हो जाएगी। उन्होंने प्रदेश में ई-गर्वनेंस लागू करने और नरेंद्रनगर में उच्च न्यायालय की बेंच खोलने पर जोर दिया। विधायक सुबोध उनियाल ने क्षेत्र में पांच हाईस्कूल, पांच जूनियर हाईस्कूल, गजा में महाविद्यालय और नरेंद्रनगर में होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट खोलने तथा राजकीय महाविद्यालय में बीए, बीएससी का पाठ्यक्रम चालू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्वार्गाश्रम से श्री कुंजापुरी मंदिर के लिए स्वीकृत रोपवे को शीघ्र ही वित्तीय स्वीकृत प्रदान की जाएगी। इससे पूर्व सीएम ने झांकियों का अवलोकन करते हुए मां कुंजापुरी के ध्वजारोहण मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने कुंजापुरी मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। इस मौके पर पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत, धीरेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी, पालिकाध्यक्ष राजेंद्र राणा, महेश गुसाईं, वीरेंद्र कंडरी, प्रमुख पार्वती कैंतुरा, संजय पालीवाल, रमेश असवाल आदि मौजूद थे।


झलकियां-
मेले का शुभारंभ करने आए सीएम को ज्ञापन देने वालों की खासी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों को मंच पर जाते देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद ज्ञापन देने वालों को मंच पर नहीं जाने दिया गया।
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स्कूली छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों से संबंधित आकर्षक झांकियां निकालीं जिसमें मां काली का दैत्यासुर वध, गणेश महोत्सव, नंदादेवी राजजात, भगवान कृष्ण के अनेक रूप, उत्तराखंड शिक्षा का हब, बाघ संरक्षण, अनेकता में एकता और राम बारात प्रमुख रूप से शामिल थी। विभिन्न विभागों के स्टाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
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