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ठहरें कैसे, पीने का पानी तक नहीं

Tehri Updated Mon, 27 May 2013 05:30 AM IST
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नई टिहरी। मैदानी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक टिहरी बांध की झील की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन वहां अपेक्षित सुविधाएं नहीं होने से उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। आलम यह है कि कोटी कालोनी से लेकर गडोलिया तक पर्यटकों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
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चिन्यालीसौड़ से घोंटी तक 42 वर्ग किमी में फैली टिहरी बांध की झील को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आ रहे हैं। लेकिन सरकार के स्तर पर पर्यटकों को रिझाने के लिए कोई इंतजाम न होने से उन्हें न तो टिहरी बांध के बारे में जानकारी मिल पा रही है, और न ही झील में नौकायन जैसी सुविधाएं। इन दिनों झील देखने के लिए करीब हर दिन औसतन 15 से 20 छोटे- बड़े वाहनों में 100 से अधिक पर्यटक कोटी कालोनी क्षेत्र में पहुंच रहे है। जहां सुविधाएं न होने से वे फोटो खिंचवाने तक सीमित है। कोटी कालोनी, व्यू प्वांइट भागीरथीपुरम, खांडखाला, जीरो ब्रिज, टिपरी सहित कई स्थानों पर होटल, ढाबों, रेस्तरां, पीने का पानी, जानकारी के लिए साइन बोर्ड तक का अभाव है। भागीरथीपुरम में आइसक्रीम के बेचने वाला सीताराम कहते हैं कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे झील देखने के लिए पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। दिल्ली से आई पर्यटक नम्रता, सोनिका गोयल, अमित कुमार गोयल कहते हैं कि बांध की इनती बड़ी झील को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। परंतु झील क्षेत्र के आसपास पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है।

कोट-
झील क्षेत्र में पर्यटकों को सुविधाएं देने के लिए भारत सरकार ने राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी की स्वीकृति दी है। इसी योजना के तहत झील में नौकायन, होटल, ढाबों को विकसित करने के का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। भूमि के अभाव के कारण शैचालयों का निर्माण नहीं हो पाया है। -जसपाल चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी नई टिहरी
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