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Charkhi Dadri News: अटकलों के बाद आखिरकार किसानों को बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन जारी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:08 PM IST
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चरखी दादरी। अब बिजली निगम ने सभी किसानों को बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन जारी कर दिए हैं। इसके लिए निगम ने करीब 55 गांवों में 35 किलोमीटर लंबी केबल लगाई। हिसार, नारनौल, हांसी, कैथल आदि से ट्रांसफार्मर मंगवाए गए। प्रत्येक कनेक्शन के लिए 16, 20 व 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। अधिकतर कनेक्शन बाढड़ा खंड में ही हैं। इस खंड में कुछ विवादित कनेक्शनों को छोड़कर अन्य सभी 561 कनेक्शन जारी कर दिए हैं। जिले भर में 1071 कनेक्शन लगाए जाने की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल से चल रही थी। बिजली निगम ने रबी की फसलों की कटाई का काम खत्म होते ही टयूबवेल कनेक्शन जारी करने का काम फिर से शुरू कर दिया था। किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए छह साल से इंतजार था।
रेतीले क्षेत्र में करते हैं सिंचाई
विदित रहे रेतीला एरिया में किसान बिजली चालित ट्यूबवेल से ही फसलों की सिंचाई करते हैं। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे तक हैं। ऐसे में मोटर के जरिए पानी का उठान करना पड़ता है। जिले में 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है। यहां सिंचाई का साधन जमीनी पानी ही है। हालांकि नहरें भी गुजरती है जिनसे सिंचाई पूरी तरह से संभव नहीं है। रेत के टिब्बे होने से नहरी पानी से सिंचाई करना मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसलें तो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती हैं। कई सालों से बारिश कम होने की वजह से रेतीला क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर बढ़ने के बजाय घट ही रहा है। आने वाले समय में यहां पेयजल संकट भी गहराने के आसान बनने लगे हैं। नहरी पानी की उपलब्धता वैसे ही कम है।
लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे किसान
ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए किसान लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे। भाकियू, किसान सभा व अन्य किसान संगठन संयुक्त रूप से आवाज उठाते रहे। गत मानसून सीजन से पहले कनेक्शन जारी करने का काम शुरू हुआ था। बीच में काम बाधित होता रहा। अप्रैल माह में फसल कटाई एवं कढ़ाई के समय दिक्कत बनी रही। बीच में पर्याप्त मात्रा में ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने की वजह से काम में बाधा आई थी।
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वर्सन:
सभी बकाया कनेक्शन जारी कर दिए गए हैं। कुछ विवादित कनेक्शनों को छोड़कर अन्य सभी जारी कर दिए गए हैं। बिजली लाइनों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नए पोल लगाए जा रहे हैं। - रामसिंह, एसडीओ, बिजली निगम।
रेतीले क्षेत्र में करते हैं सिंचाई
विदित रहे रेतीला एरिया में किसान बिजली चालित ट्यूबवेल से ही फसलों की सिंचाई करते हैं। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे तक हैं। ऐसे में मोटर के जरिए पानी का उठान करना पड़ता है। जिले में 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है। यहां सिंचाई का साधन जमीनी पानी ही है। हालांकि नहरें भी गुजरती है जिनसे सिंचाई पूरी तरह से संभव नहीं है। रेत के टिब्बे होने से नहरी पानी से सिंचाई करना मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसलें तो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती हैं। कई सालों से बारिश कम होने की वजह से रेतीला क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर बढ़ने के बजाय घट ही रहा है। आने वाले समय में यहां पेयजल संकट भी गहराने के आसान बनने लगे हैं। नहरी पानी की उपलब्धता वैसे ही कम है।
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लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे किसान
ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए किसान लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे। भाकियू, किसान सभा व अन्य किसान संगठन संयुक्त रूप से आवाज उठाते रहे। गत मानसून सीजन से पहले कनेक्शन जारी करने का काम शुरू हुआ था। बीच में काम बाधित होता रहा। अप्रैल माह में फसल कटाई एवं कढ़ाई के समय दिक्कत बनी रही। बीच में पर्याप्त मात्रा में ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने की वजह से काम में बाधा आई थी।
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सभी बकाया कनेक्शन जारी कर दिए गए हैं। कुछ विवादित कनेक्शनों को छोड़कर अन्य सभी जारी कर दिए गए हैं। बिजली लाइनों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नए पोल लगाए जा रहे हैं। - रामसिंह, एसडीओ, बिजली निगम।