{"_id":"6a1de8d9caee7a81e70803a3","slug":"balaji-rice-mills-partner-arun-arrested-karnal-news-c-18-knl1018-919048-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: बालाजी राइस मिल का हिस्सेदार अरुण गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: बालाजी राइस मिल का हिस्सेदार अरुण गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
करनाल।
तरावड़ी की दो राइस मिलों में सामने आए करीब 12.60 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस ने बालाजी राइस मिल के हिस्सेदार अरुण को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में नामजद बर्खास्त सहायक निरीक्षक रामफल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में नामजद निलंबित निरीक्षक देवेंद्र, बालाजी मिल के मालिक मोहित और सुरेंद्र तथा विश्वकर्मा राइस मिल के संचालक महेंद्र जांगड़ा अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
यह घोटाला उस समय उजागर हुआ था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया था। जांच के दौरान दोनों मिलों में सरकार की ओर से आवंटित 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला, जिससे 12.60 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ। दोनों मामलों में दर्ज एफआईआर के बावजूद अभी तक केवल रामफल और अरुण की गिरफ्तारी हो सकी है। तरावड़ी थाना के जांच अधिकारी हरविश कुमार ने बताया कि बालाजी राइस मिल के मालिक अरुण को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान मिला कम
डीएफएससी मुकेश कुमार के औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन में बालाजी राइस में 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह धान मिल में मौजूद होना चाहिए था लेकिन मौके पर इसका कोई रिकॉर्ड या स्टॉक नहीं मिला। जांच के दौरान पाया गया कि मिल में धान की देखरेख की जिम्मेदारी तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र (वर्तमान में निलंबित) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के पास थी। वहीं सरकार को धान के बदले चावल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मिल मालिक मोहित, सुरेंद्र और उनके पार्टनर अरुण की थी।
विज्ञापन
जब अधिकारियों ने गायब धान के संबंध में जानकारी मांगी तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच टीम को मिल के अंदर कार्यरत मशीनरी की जगह स्क्रैप मशीनरी मिली। अधिकारियों के अनुसार आरोपी बाद में नई मशीनें लगाने की तैयारी कर रहे थे, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया। इसके बाद डीएफएससी की शिकायत पर तरावड़ी थाना पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
विश्वकर्मा राइस मिल से 26 हजार क्विंटल धान गायब
डीएफएससी ने विश्वकर्मा राइस मिल का भी भौतिक सत्यापन किया। जांच में यहां 26 हजार क्विंटल धान कम मिला, जिसकी कीमत करीब 9.10 करोड़ रुपये आंकी गई। इस प्रकार दोनों मिलों में कुल 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला और घोटाले की राशि करीब 12.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि विश्वकर्मा राइस मिल में धान से चावल तैयार करने के लिए आवश्यक मशीनरी तक मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद मिल को सरकारी धान आवंटित किया गया था।
विश्वकर्मा राइस मिल ने सरकार को निर्धारित कोटे के अनुसार एक भी दाना चावल वापस नहीं किया था। इसी वजह से विभाग को संदेह हुआ और भौतिक सत्यापन कराया गया।
तरावड़ी की दो राइस मिलों में सामने आए करीब 12.60 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस ने बालाजी राइस मिल के हिस्सेदार अरुण को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में नामजद बर्खास्त सहायक निरीक्षक रामफल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में नामजद निलंबित निरीक्षक देवेंद्र, बालाजी मिल के मालिक मोहित और सुरेंद्र तथा विश्वकर्मा राइस मिल के संचालक महेंद्र जांगड़ा अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
यह घोटाला उस समय उजागर हुआ था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया था। जांच के दौरान दोनों मिलों में सरकार की ओर से आवंटित 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला, जिससे 12.60 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ। दोनों मामलों में दर्ज एफआईआर के बावजूद अभी तक केवल रामफल और अरुण की गिरफ्तारी हो सकी है। तरावड़ी थाना के जांच अधिकारी हरविश कुमार ने बताया कि बालाजी राइस मिल के मालिक अरुण को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान मिला कम
डीएफएससी मुकेश कुमार के औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन में बालाजी राइस में 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह धान मिल में मौजूद होना चाहिए था लेकिन मौके पर इसका कोई रिकॉर्ड या स्टॉक नहीं मिला। जांच के दौरान पाया गया कि मिल में धान की देखरेख की जिम्मेदारी तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र (वर्तमान में निलंबित) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के पास थी। वहीं सरकार को धान के बदले चावल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मिल मालिक मोहित, सुरेंद्र और उनके पार्टनर अरुण की थी।
Trending Videos
जब अधिकारियों ने गायब धान के संबंध में जानकारी मांगी तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच टीम को मिल के अंदर कार्यरत मशीनरी की जगह स्क्रैप मशीनरी मिली। अधिकारियों के अनुसार आरोपी बाद में नई मशीनें लगाने की तैयारी कर रहे थे, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया। इसके बाद डीएफएससी की शिकायत पर तरावड़ी थाना पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
विश्वकर्मा राइस मिल से 26 हजार क्विंटल धान गायब
डीएफएससी ने विश्वकर्मा राइस मिल का भी भौतिक सत्यापन किया। जांच में यहां 26 हजार क्विंटल धान कम मिला, जिसकी कीमत करीब 9.10 करोड़ रुपये आंकी गई। इस प्रकार दोनों मिलों में कुल 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला और घोटाले की राशि करीब 12.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि विश्वकर्मा राइस मिल में धान से चावल तैयार करने के लिए आवश्यक मशीनरी तक मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद मिल को सरकारी धान आवंटित किया गया था।
विश्वकर्मा राइस मिल ने सरकार को निर्धारित कोटे के अनुसार एक भी दाना चावल वापस नहीं किया था। इसी वजह से विभाग को संदेह हुआ और भौतिक सत्यापन कराया गया।