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रचा इतिहासः पूर्वोत्तर से किसी हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस बनने वाली पहली महिला बनीं मीनाक्षी, तीन दशक लंबा अनुभव
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सार
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। वह पूर्वोत्तर भारत से किसी भी हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला हैं। उनकी नियुक्ति को न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट-
पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं पूर्वोत्तर से आने वालीं न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। सिक्किम की न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। इसके साथ ही वह पूर्वोत्तर भारत से किसी भारतीय उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला बन गई हैं।
न्यायमूर्ति राय ने न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू का स्थान लिया है, जो इस वर्ष की शुरुआत में सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी नियुक्ति को न केवल सिक्किम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। न्यायिक और विधि समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यह नियुक्ति उच्च न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और प्रतिनिधित्व का प्रतीक है।
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का न्यायिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने वर्ष 1990 में सिक्किम की पहली महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-सह-सिविल जज के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय यह उपलब्धि राज्य की न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रगति मानी गई थी।
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इसके बाद उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिक्किम हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 2015 में वह सिक्किम हाईकोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली राज्य की पहली महिला बनीं और अब पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है।
पटना हाईकोर्ट में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सरकारी अधिकारियों और विधि समुदाय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति राय को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी गईं। सिक्किम के राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। इसे हिमालयी राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा गया कि न्यायमूर्ति राय की उपलब्धि देशभर की महिला विधि पेशेवरों और न्यायिक सेवा में आने वाली युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
मील के पत्थर साबित हुईं न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से उच्च न्यायपालिका में कई प्रतिष्ठित न्यायाधीश रहे हैं, लेकिन किसी भारतीय हाईकोर्ट का नेतृत्व करने वाली महिला न्यायाधीश के रूप में यह पहली नियुक्ति है। इसे न्यायपालिका में क्षेत्रीय और लैंगिक प्रतिनिधित्व के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
न्यायमूर्ति राय ने न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू का स्थान लिया है, जो इस वर्ष की शुरुआत में सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी नियुक्ति को न केवल सिक्किम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। न्यायिक और विधि समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यह नियुक्ति उच्च न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और प्रतिनिधित्व का प्रतीक है।
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न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का न्यायिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने वर्ष 1990 में सिक्किम की पहली महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-सह-सिविल जज के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय यह उपलब्धि राज्य की न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रगति मानी गई थी।
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इसके बाद उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिक्किम हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 2015 में वह सिक्किम हाईकोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली राज्य की पहली महिला बनीं और अब पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है।
पटना हाईकोर्ट में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सरकारी अधिकारियों और विधि समुदाय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति राय को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी गईं। सिक्किम के राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। इसे हिमालयी राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा गया कि न्यायमूर्ति राय की उपलब्धि देशभर की महिला विधि पेशेवरों और न्यायिक सेवा में आने वाली युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
मील के पत्थर साबित हुईं न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय
- 1990 में सिक्किम की पहली महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-सह-सिविल जज बनीं।
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं।
- सिक्किम हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहीं।
- 2015 में सिक्किम हाईकोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बनीं।
- 2026 में पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पूर्वोत्तर भारत की पहली महिला बनीं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से उच्च न्यायपालिका में कई प्रतिष्ठित न्यायाधीश रहे हैं, लेकिन किसी भारतीय हाईकोर्ट का नेतृत्व करने वाली महिला न्यायाधीश के रूप में यह पहली नियुक्ति है। इसे न्यायपालिका में क्षेत्रीय और लैंगिक प्रतिनिधित्व के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।