'ॐ नमः शिवाय' सावन के शुभ महीने की शुरुआत आज यानी 17 जुलाई से हो चुकी है। इस शुभ महीने में महिलाएं हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं और भगवान शिव की पूजा करती हैं। सावन में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ती है। इस महीने में ही कावंर यात्रा भी शुरू हो जाती है। भारत में भगवान शिव के बेहद पुराने महत्वपूर्ण मंदिर भी हैं। माना जाता है कि इन मंदिरों में दर्शन करने से भाग्य खुल जाते हैं। खासकर सावन में यहां दर्शन करने से खास भगवान शिव की कृपा बरसती है। आज हम आपको बताएंगे कि भोलेनाथ के किन मंदिरों में दर्शन करने जरूर जाएं और कैसे पहुचें।
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सावन 2019: भोलेनाथ के इन खास मंदिरों के दर्शन करना न भूलें इस बार, यहां होता है सबका बेड़ा पार
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Wed, 17 Jul 2019 04:45 PM IST
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उज्जैन
शिप्रा नदी के तट पर बसे उज्जैन शहर में सावन के महीने में गजब भीड़ उमड़ती है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भगवन शिव का मशहूर मंदिर है। सावन में महाकालेश्वर के दर्शन करना अच्छा माना जाता है। सावन के महीने में मौसम भी घूमने लायक होता है।
ऐसे पहुचें महाकालेश्वर
वायुमार्ग- उज्जैन में कोई एयरपोर्ट नहीं है।सबसे नजदीकी हवाईअड्डा इंदौर में है जो करीब 58 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या बस लेकर उज्जैन पहुंच सकते हैं इसमें करीब एक घंटे का समय लगता है।
रेलमार्ग- उज्जैन लगभग देश के सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है। उज्जैन तक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
सड़कमार्ग- उज्जैन में सड़को का अच्छा जाल बिछा है और यह देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। राष्ट्रीय हाईवे 48 और राष्ट्रीय हाइवे 52 इसे देश के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।
शिप्रा नदी के तट पर बसे उज्जैन शहर में सावन के महीने में गजब भीड़ उमड़ती है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भगवन शिव का मशहूर मंदिर है। सावन में महाकालेश्वर के दर्शन करना अच्छा माना जाता है। सावन के महीने में मौसम भी घूमने लायक होता है।
ऐसे पहुचें महाकालेश्वर
वायुमार्ग- उज्जैन में कोई एयरपोर्ट नहीं है।सबसे नजदीकी हवाईअड्डा इंदौर में है जो करीब 58 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या बस लेकर उज्जैन पहुंच सकते हैं इसमें करीब एक घंटे का समय लगता है।
रेलमार्ग- उज्जैन लगभग देश के सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है। उज्जैन तक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
सड़कमार्ग- उज्जैन में सड़को का अच्छा जाल बिछा है और यह देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। राष्ट्रीय हाईवे 48 और राष्ट्रीय हाइवे 52 इसे देश के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।
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गुजरात
सोमनाथ का मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर है जिसका भारत की ऐतिहासिक किताबों में भी उल्लेख है। सावन के महीने में सोमनाथ का मंदिर सुबह 4 बजे खुल जाता है और रात को 10 बजे तक खुला रहता है। इस दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने जाते हैं।
ऐसे पहुचें सोमनाथ
हवाई मार्ग:सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए केशोद सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो सोमनाथ से 50 किलोमीटर दूर है।
रेलमार्ग: वेरावल सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो सोमनाथ से केवल 7 किलोमीटर दूर है।
सड़कमार्ग: सोमनाथ के लिए कई शहरों से सीधी बस सेवा भी उपलब्ध है।
सोमनाथ का मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर है जिसका भारत की ऐतिहासिक किताबों में भी उल्लेख है। सावन के महीने में सोमनाथ का मंदिर सुबह 4 बजे खुल जाता है और रात को 10 बजे तक खुला रहता है। इस दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने जाते हैं।
ऐसे पहुचें सोमनाथ
हवाई मार्ग:सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए केशोद सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो सोमनाथ से 50 किलोमीटर दूर है।
रेलमार्ग: वेरावल सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो सोमनाथ से केवल 7 किलोमीटर दूर है।
सड़कमार्ग: सोमनाथ के लिए कई शहरों से सीधी बस सेवा भी उपलब्ध है।
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वाराणसी
भोलेनाथ कि नगरी कही जाने वाली वाराणसी में सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ इकठ्ठा होती है..भगवान शिव के खास दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां पैदल यात्रा करके भी पहुंचते हैं..बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। दर्शन करने जाएं तो गंगा आरती देखना ना भूलें।
ऐसे पहुंचें कशी विश्वनाथ
रेलमार्ग: किसी भी शहर से आप वाराणसी ट्रेन के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं।
सड़कमार्ग: आसपास के जिलों से बनारस की बस भी उपलब्ध है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज से वाराणसी के लिए बस आराम से मिल सकती है।
हवाई मार्ग: वाराणसी का बाबतपुर हवाई अड्डा भी देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
भोलेनाथ कि नगरी कही जाने वाली वाराणसी में सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ इकठ्ठा होती है..भगवान शिव के खास दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां पैदल यात्रा करके भी पहुंचते हैं..बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। दर्शन करने जाएं तो गंगा आरती देखना ना भूलें।
ऐसे पहुंचें कशी विश्वनाथ
रेलमार्ग: किसी भी शहर से आप वाराणसी ट्रेन के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं।
सड़कमार्ग: आसपास के जिलों से बनारस की बस भी उपलब्ध है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज से वाराणसी के लिए बस आराम से मिल सकती है।
हवाई मार्ग: वाराणसी का बाबतपुर हवाई अड्डा भी देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
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कर्नाटक
यहां कण-कण में शिव बसे हैं। इसी मंदिर में दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग के साथ ही करीब 1 करोड़ शिवलिंग भी हैं। इसे कोटिलिंगेश्वर धाम कहते हैं, जो कर्नाटक के कोलार जिले के एक छोटे से गांव काम्मासांदरा में बसा है। यहां मंदिर का आकार ही शिवलिंग के रूप में है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग भी है। शिवलिंग रूप में इस मंदिर की ऊंचाई 108 फीट है। यहां हवाईयात्रा करके पहुंच सकते हैं।