सब्सक्राइब करें

Smartphone Risk: विशेषज्ञों की सलाह इस उम्र तक के बच्चों को मोबाइल से रखें दूर, जानिए क्या हैं इसके खतरे

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 12 Jun 2026 06:43 PM IST
सार

स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने देश के सभी माता-पिता को सलाह दी है कि वे 13 साल से कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दें। उनका तर्क है कि बचपन में इन डिवाइस से होने वाले संभावित नुकसान काफी गंभीर और जीवनभर रहने वाले हो सकते हैं।
 

विज्ञापन
Sweden advised parents not to give smartphones to children before the age of 13 know its health risk
बढ़ता स्क्रीन टाइम - फोटो : Freepik.com

मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ाता जा रहा है। बच्चों के लिए इसे और भी समस्याकारक माना जाता है। पढ़ाई से लेकर गेमिंग और मनोरंजन तक, लगभग हर काम मोबाइल से होने लगा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। 



मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों की समस्याएं, नींद में कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और व्यवहार संबंधी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इतना ही नहीं, लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों का सामाजिक कौशल भी प्रभावित हो रहा है।

इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने देश के सभी माता-पिता को सलाह दी है कि वे 13 साल से कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दें। उनका तर्क है कि बचपन में इन डिवाइस से होने वाले संभावित नुकसान काफी गंभीर और जीवनभर रहने वाले हो सकते हैं।

Sweden advised parents not to give smartphones to children before the age of 13 know its health risk
13 साल से कम उम्र वालों के लिए मोबाइल नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com

मोबाइल बिगाड़ रहा है बच्चों की सेहत

स्वीडन की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि इसका मकसद मुख्य रूप से बच्चों को नुकसानदायक कंटेंट, नींद की समस्याओं से बचाना है।
 

  • एजेंसी ने माना कि स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों में ध्यान भटकने, सोशल प्रेशर और नुकसानदायक कंटेंट के संपर्क में आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • एजेंसी ने स्मार्टफोन के इस्तेमाल और नींद की खराब क्वालिटी के बीच संबंध पर भी जोर दिया। 
  • विशेषज्ञों ने कहा, यह चिंता सिर्फ स्वीडन तक ही सीमित नहीं है। दुनियाभर के बच्चों में मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती देखी जा रही हैं। कई समस्याएं तो ऐसी हैं जिनका असर पूरे जीवन बना रह सकता है।
Sweden advised parents not to give smartphones to children before the age of 13 know its health risk
मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के खतरे - फोटो : adobe stock
बच्चों में मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से क्या दिक्कतें होती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा मोबाइल चलाते रहने वाले बच्चों में नींद की कमी बढ़ती देखी जा रही है। कम उम्र में कम नींद मिल पाना कई क्रॉनित बीमारियों को जन्म दे सकता है।
  • बच्चों में नींद की कमी से उनकी याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता, भावनाओं पर काबू रखने की क्षमता और सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
  •  समय के साथ, नींद की खराब आदतों से तनाव और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। 

इतना ही नहीं अत्यधिक स्क्रीन टाइम को बच्चों में चिंता, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला भी पाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Sweden advised parents not to give smartphones to children before the age of 13 know its health risk
आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

इन जोखिमों को भी जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल कई समस्याओं को जन्म दे सकता है।
 

  • लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन हो सकता है। ब्लू लाइट आंखों की थकान बढ़ाती है और डिजिटल आई स्ट्रेन का कारण बन सकती है।
  • मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इससे बच्चों की नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
  • लगातार रील्स और गेम बच्चों के दिमाग को तत्काल उत्तेजना की आदत डाल सकते हैं। इससे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है।
  • मोबाइल चलाने में अधिक समय बिताने वाले बच्चे अक्सर शारीरिक गतिविधियां कम कर पाते हैं। इससे वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।




--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed