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हिमाचल: दैनिक भोगी कर्मचारी काल्पनिक नहीं, वास्तविक वित्तीय लाभ के हकदार, हाईकोर्ट ने सरकार के तर्क किए खारिज

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 02 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

अदालत ने कहा है कि पूर्वव्यापी नियमितीकरण मिलने पर उन्हें केवल काल्पनिक नहीं, बल्कि पूरे वास्तविक वित्तीय लाभ मिलने चाहिए। 

Himachal: Daily Wage Employees Entitled to Actual, Not Fictional, Financial Benefits; High Court Rejects Govt
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक भोगी कर्मचारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि पूर्वव्यापी नियमितीकरण मिलने पर उन्हें केवल काल्पनिक नहीं, बल्कि पूरे वास्तविक वित्तीय लाभ मिलने चाहिए। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने सरकार के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि जब तक अदालत स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभों को न रोके, तब तक परिणामी लाभ का सीधा मतलब पूरा वास्तविक मौद्रिक लाभ होता है। विभाग अपनी गलती और देरी का खामियाजा गरीब चतुर्थ कर्मचारियों पर नहीं फोड़ सकता है। अदालत ने लेबर कोर्ट के एक आदेश को पूरी तरह सही ठहराया। इस आदेश में कर्मचारियों को 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ 2012 से 2015 तक के वेतन के अंतर का पूरा एरियर देने को कहा गया था। अदालत ने कहा कि अगर कर्मचारियों की सेवा में निरंतरता है, तो वे वास्तविक वित्तीय लाभ के हकदार हैं।

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यह है मामला

यह पूरा मामला दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्हें लोक निर्माण विभाग में काम करते समय पर काल्पनिक ब्रेक दे कर सेवा से बाहर रखा गया था। लेबर कोर्ट ने माना कि विभाग की ओर ऐसा करना गलत और अवैध था। कोर्ट ने आदेश दिया कि इन कर्मचारियों की वरिष्ठता शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही गिनी जाए और इन्हें उनके जूनियर कर्मचारियों के नियमित होने की तारीख से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। आदेश के बाद सरकार ने कागजों पर तो इन कर्मचारियों को साल 2012 से नियमित कर दिया, लेकिन उन्हें उस अवधि (2012 से 2015) का वेतन और एरियर देने से मना कर दिया। सरकार का तर्क था कि चूंकि लेबर कोर्ट ने पुराने वेतन देने से मना किया था, इसलिए यह लाभ भी नहीं दिया जाएगा।

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