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Mau News: बढ़ते तापमान से चिड़चिड़ापन बढ़ा, हर दिन 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे अस्पताल
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जिले में गर्मी के कारण चिड़चिड़ापन का शिकार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक और मनोरोग विभाग में रोजाना 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 10 से कम थी।
इसके पीछे डॉक्टर गर्मी की वजह से बाइपोलर मूड डिसऑर्डर होने की बात बता रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है।
एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि गर्मी में घबराहट, बेचैनी, दिल की धड़कन बढ़ना और चिड़चिड़ापन को हल्के में न लें। यह मानसिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार, उल्टी और दस्त के साथ तापमान में इजाफा होने से अवसाद और कन्वर्जन डिसऑर्डर (हिस्टीरिया) से पीड़ित मरीज भी पहुंच रहे हैं।
वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में एनसीडी क्लीनिक और मनोरोग चिकित्सक के पास बाइपोलर मूड डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं।
इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है। मनोरोग ओपीडी में पहले इन मरीजों की संख्या रोजाना आठ से 10 थी, लेकिन अब यह 20 तक पहुंच रही है।
भरपूर नींद लें, लापरवाही न करें
अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रवीशंकर पांडेय ने बताया कि जब हमारा शरीर उच्च तापमान के संपर्क में आता है, तो वह पसीना निकालकर और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके स्वयं को ठंडा करने की कोशिश करता है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने पर यह मस्तिष्क के रसायनों, जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन, के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है। यह स्थिति हमारे मूड को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, चिंता और तनाव जैसे विकारों के मामले बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, गर्मी थायराइड हार्मोन के उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे थकान, अवसाद और स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी हो सकती है।
इसके पीछे डॉक्टर गर्मी की वजह से बाइपोलर मूड डिसऑर्डर होने की बात बता रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है।
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एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि गर्मी में घबराहट, बेचैनी, दिल की धड़कन बढ़ना और चिड़चिड़ापन को हल्के में न लें। यह मानसिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार, उल्टी और दस्त के साथ तापमान में इजाफा होने से अवसाद और कन्वर्जन डिसऑर्डर (हिस्टीरिया) से पीड़ित मरीज भी पहुंच रहे हैं।
वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में एनसीडी क्लीनिक और मनोरोग चिकित्सक के पास बाइपोलर मूड डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं।
इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है। मनोरोग ओपीडी में पहले इन मरीजों की संख्या रोजाना आठ से 10 थी, लेकिन अब यह 20 तक पहुंच रही है।
भरपूर नींद लें, लापरवाही न करें
अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रवीशंकर पांडेय ने बताया कि जब हमारा शरीर उच्च तापमान के संपर्क में आता है, तो वह पसीना निकालकर और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके स्वयं को ठंडा करने की कोशिश करता है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने पर यह मस्तिष्क के रसायनों, जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन, के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है। यह स्थिति हमारे मूड को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, चिंता और तनाव जैसे विकारों के मामले बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, गर्मी थायराइड हार्मोन के उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे थकान, अवसाद और स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी हो सकती है।