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बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, डेढ़ सौ घरों की पेयजल आपूर्ति ठप; VIDEO
जलीलपुर गांव के नई बस्ती लाइन पार क्षेत्र में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। करीब डेढ़ सौ घरों की आबादी पिछले कई दिनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण दूर-दराज से पानी ढोकर किसी तरह अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि भारत सरकार की नई रेलवे लाइन चौड़ीकरण परियोजना के तहत चल रहे कार्य के दौरान करीब 15 वर्ष पूर्व बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति ठप हो गई है। गांव के समीप स्थित पानी की टंकी से इसी पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पानी पहुंचता था।
नई बस्ती के लोग पहले से ही जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए पूर्व सांसद महेंद्र नाथ पांडेय और विधायक रमेश जायसवाल के प्रयास से लगभग 70 लाख रुपये की लागत से अंडरग्राउंड सीवर लाइन परियोजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन रेलवे की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य अधूरा रह गया। अब पेयजल संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
रविवार शाम ग्रामीणों ने विभागीय उदासीनता के विरोध में प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अब तक न तो पाइपलाइन की मरम्मत हुई और न ही टैंकर से पानी की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीणों में रेलवे विभाग और जल निगम के प्रति भारी नाराजगी है।
भाजपा नेत्री समा परवीन ने कहा कि भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संबंधित विभागों को तत्काल समस्या का समाधान करना चाहिए।
गुलाबी देवी ने बताया कि सुबह-शाम दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे परिवार के लिए भोजन बनाना भी मुश्किल हो गया है। विभाग उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है।
दशरथ सेठ ने कहा कि रेलवे विभाग के कार्य के दौरान पाइपलाइन टूटी है, इसलिए उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी उसी विभाग की है। पूरा गांव पानी के लिए परेशान है।
मिंटू मौलवी ने बताया कि काफी प्रयास के बाद गांव में बोरिंग कराकर जलापूर्ति व्यवस्था बनाई गई थी। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से अब लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कंचन उपाध्याय ने कहा कि नई बस्ती में पहले कभी पेयजल की ऐसी समस्या नहीं हुई। कार्यदायी संस्था की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
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