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US-Iran Peace Talks: Consensus Reached on Draft of Peace Agreement; Will the Strait of Hormuz Reopen? | Trump
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US-IRan Peace Talk: ईरान-US शांति समझौते के मसौदे पर बनी सहमति, खुलेगा होर्मुज? Hormuz | Trump
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 27 May 2026 09:53 PM IST
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क्या मध्य पूर्व में खत्म होने जा रहा है दुनिया का सबसे बड़ा तनाव? क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से दौड़ेंगे व्यापारिक जहाज? और क्या अमेरिका-ईरान के बीच वर्षों की दुश्मनी अब शांति समझौते में बदलने जा रही है?
ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ शांति समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार हो चुका है। इस डील में होर्मुज जलमार्ग खोलने, समुद्री नाकाबंदी खत्म करने और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करने जैसे बड़े संकेत मिले हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बड़ा बयान देकर दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। तो क्या सचमुच टकराव से बातचीत की ओर बढ़ रहे हैं अमेरिका और ईरान? आइए जानते हैं इन तमाम सवालों के जवाब इस वीडियो में।
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ शांति समझौते का एक शुरुआती मसौदा तैयार हो गया है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य हो सकती है और महीनों से जारी समुद्री तनाव कम होने की उम्मीद है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, इस प्रारंभिक मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले के स्तर तक बहाल करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके तहत ईरान एक महीने के भीतर समुद्री व्यापार को सामान्य स्थिति में लाने की दिशा में कदम उठाएगा।
इसके बदले अमेरिका कथित तौर पर ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य ताकत को कम करेगा और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने पर सहमत हुआ है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका केवल हाल में भेजी गई अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को हटाएगा या क्षेत्र में पहले से मौजूद सैन्य ठिकानों पर तैनात सैनिकों की संख्या भी घटाई जाएगी। इस मुद्दे पर आगे बातचीत होनी बाकी है।
ईरानी समाचार एजेंसी मिजान ने इस प्रस्ताव को “बहु-स्तरीय शांति प्रक्रिया” की शुरुआत बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अगले 60 दिनों के भीतर दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बाध्यकारी प्रस्ताव के तौर पर पेश किया जा सकता है। यानी यह समझौता अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी हासिल कर सकता है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से तनाव चरम पर रहा है। दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम के बावजूद कई बार हालात बेहद तनावपूर्ण हुए। मई की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिका का आरोप था कि ईरान ने उसके युद्धपोतों को मिसाइलों, ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाओं से निशाना बनाने की कोशिश की थी।
इन घटनाओं के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ गया था। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर बनी रहती है।
अमेरिका लंबे समय से इस इलाके में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बनाए हुए है। वाशिंगटन का कहना रहा है कि वह वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कर रहा है। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर दबाव बनाने की रणनीति बताता रहा है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाना चाहिए ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर दोनों देश मिलकर ईरान में ही उसे खत्म करने की प्रक्रिया पूरी करें।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि परमाणु समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वार्ता “अच्छे तरीके से” चल रही है। दूसरी ओर ईरान ने भी स्वीकार किया है कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार बदलते रुख की वजह से बातचीत जटिल हो रही है।
हालांकि अभी यह समझौता शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस संवेदनशील बातचीत पर टिकी हुई है।
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