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रूस का बड़ा फैसला: विमानन ईंधन के निर्यात पर लगाई रोक, 30 नवंबर तक लागू रहेगा प्रतिबंध

एएनआई, मॉस्को। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 02 Jun 2026 03:00 AM IST
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सार

रूस ने घरेलू बाजार में तेल की कमी को रोकने के लिए 30 नवंबर तक विमानन ईंधन के निर्यात पर रोक लगा दी है। यूक्रेन के हवाई हमलों के कारण रूस की तेल रिफाइनरियों का उत्पादन काफी घट गया है। देश में ईंधन की मांग बढ़ने वाली है, इसलिए सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, पहले से तय सरकारी संधियों के तहत होने वाले निर्यात पर कोई रोक नहीं होगी।
 

russia bans aviation fuel export till november 30 amid refinery crisis
रूस का बड़ा फैसला - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

रूस ने विमानन ईंधन यानी एविएशन फ्यूल के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह पाबंदी 30 नवंबर तक लागू रहेगी। रूसी सरकार ने देश के भीतर ईंधन की सप्लाई सामान्य रखने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। क्रेमलिन ने सोमवार को इस रणनीति की घोषणा की। सरकार का कहना है कि इस फैसले का एकमात्र मकसद घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।


रिफाइनरियों में उत्पादन हुआ कम
पिछले कुछ समय से रूस में डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने की चर्चा चल रही थी। अब सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है। दरअसल, रूस के ऊर्जा केंद्रों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। इन हमलों की वजह से तेल रिफाइनरियों में कामकाज बहुत कम हो गया है। उत्पादन का यह स्तर पिछले कई साल में सबसे निचला स्तर है।
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यह भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 'दबाव बढ़ेगा तो पुतिन करेंगे बातचीत', जेलेंस्की की रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग
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यूक्रेन के हमलों से बढ़ा संकट
बीते कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। तेल साफ करने वाली रिफाइनरियों और पाइपलाइन नेटवर्क को लगातार निशाना बनाया गया है। इन हवाई हमलों के कारण रूस की तेल साफ करने की क्षमता घट गई है। आने वाले दिनों में देश के भीतर ईंधन की मौसमी मांग बढ़ने वाली है। इसे देखते हुए सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू बाजार को सुरक्षित करना है।

वैश्विक बाजार और संधियों पर असर
रूस दुनिया में रिफाइंड पेट्रोलियम का एक बहुत बड़ा निर्यातक देश है। वह हर साल भारी मात्रा में डीजल और जेट ईंधन दूसरे देशों को बेचता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इस नए प्रतिबंध का असर पुराने समझौतों पर नहीं पड़ेगा। दो देशों की सरकारों के बीच जो संधियां पहले से तय हैं, उनके तहत ईंधन की सप्लाई जारी रहेगी। इससे पहले रूस अपने ऑटोमोबाइल ईंधन के निर्यात पर भी ऐसी ही पाबंदियां लगा चुका है।
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