सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   us designates brazil gangs terrorists sway october election

ब्राजील चुनाव में अमेरिकी दखल: लूला की कमजोर नस पर वार, राष्ट्रपति ट्रंप की चाल पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

पीटीआई, रियो डी जेनेरियो। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 02 Jun 2026 02:24 AM IST
विज्ञापन
सार

ट्रंप ने ब्राजील के दो स्थानीय गिरोहों पर 'आतंकी' का ठप्पा लगाकर सीधे वहां के राष्ट्रपति चुनाव में दखल दे दिया है। ड्रग्स तस्करी का बहाना बनाकर अमेरिका असल में राष्ट्रपति लूला की कुर्सी हिलाना और अपने चहेते बोल्सोनारो को सत्ता पर बिठाना चाहता है। महाशक्ति के इस चुनावी चक्रव्यूह ने लूला को 'लाल' कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
 

us designates brazil gangs terrorists sway october election
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

अमेरिका ने ब्राजील के दो बड़े आपराधिक गिरोहों को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। जानकारों और राजनेताओं का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह राजनीतिक है। इसका सीधा मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनावी फायदा पहुंचाना है। फ्लावियो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। ये दोनों गिरोह लैटिन अमेरिका के उन आठ अन्य गिरोहों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिन्हें अमेरिका आतंकवादी मानता है। लेकिन इन दोनों में एक बड़ा फर्क है। ये गिरोह अमेरिका के अंदर काम नहीं करते हैं।


इन दोनों गिरोहों के नाम 'फर्स्ट कैपिटल कमांड' (पीसीसी) और 'रेड कमांड' (सीवी) हैं। इन्हें आतंकी सूची में डालने का फैसला सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के अमेरिका दौरे के तुरंत बाद आया है। फ्लावियो ने पिछले हफ्ते ही अमेरिका का दौरा किया था। उन्होंने खुद बताया कि उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर इन गिरोहों को आतंकी घोषित करने की मांग की थी। ब्राजील में इसी साल अक्तूबर में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। फ्लावियो इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को हराना चाहते हैं। अमेरिका के इस फैसले से फ्लावियो की छवि मजबूत होगी। उन्हें जनता के सामने खुद को अपराध पर सख्त नेता दिखाने का मौका मिलेगा। साथ ही वह सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति लूला को घेर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या ब्राजील से अमेरिका जाता है ड्रग्स? 
लैटिन अमेरिका मामलों के विशेषज्ञ ब्रायन विंटर ने इस पर अपनी राय दी है। वह काउंसिल ऑफ अमेरिका की पत्रिका अमेरिकाज़ क्वार्टरली के संपादक हैं। विंटर ने कहा, 'इस फैसले की सबसे बड़ी वजह राजनीति है। इसका मकसद अक्तूबर चुनाव से पहले राष्ट्रपति लूला पर दबाव बनाना और फ्लावियो की मदद करना है। रियो डी जेनेरियो की यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफेसर कैरोलिना ग्रिलो भी इस बात से सहमत हैं। वह संगठित अपराध की एक्सपर्ट हैं। ग्रिलो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला सिर्फ चुनाव को प्रभावित करने के लिए है।
विज्ञापन
Trending Videos


प्रोफेसर ग्रिलो ने इसके पीछे के तथ्य भी समझाए। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में जो कोकीन पहुंचती है, उसके रास्ते अलग हैं। वह ड्रग्स कोलंबिया, मैक्सिको और मध्य अमेरिकी देशों से होकर जाता है, ब्राजील से नहीं।' उन्होंने यह भी बताया कि ब्राजील में जितनी कोकीन पकड़ी जाती है, उसका 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा यूरोपीय देशों के लिए होता है, अमेरिका के लिए नहीं।

यह भी पढ़ें: पीटर मैंडेलसन का दावा पड़ा भारी: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी पर संकट, लेबर पार्टी में सिरफुटौव्वल

'हम कोई बनाना रिपब्लिक नहीं हैं': भड़के राष्ट्रपति लूला
राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने साफ कहा कि ब्राजील अपनी समस्याओं से खुद निपट रहा है। उन्होंने सबूत के तौर पर हाल ही में हुई गिरफ्तारियों और पीसीसी गिरोह के खिलाफ चल रही जांच का हवाला दिया। शुक्रवार को लूला ने गुस्से में कहा, 'आज मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हमारे अपराधियों को आतंकवादी कह दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी इसमें दखल दे सकते हैं। लूला ने आगे कहा, 'हम खुद को बच्चों की तरह आंके जाना बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम यह कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि हमारे देश के साथ किसी 'बनाना रिपब्लिक' जैसा बर्ताव हो।'

ट्रंप ने ब्राजील के सामानों पर बढ़ाया था टैरिफ
पिछले साल जब ट्रंप ने ब्राजील के सामानों पर 50% सीमा शुल्क यानी टैरिफ बढ़ाया था, तब लूला की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई थी। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक क्रेओमार डी सूजा का कहना है कि इस बार लूला के लिए खेल आसान नहीं होगा। वह इसे आसानी से देश के सम्मान और संप्रभुता से नहीं जोड़ पाएंगे। सूजा ने कहा कि सबसे पहली बात तो फ्लावियो इसका पूरा प्रचार करेंगे। वह लूला की सबसे कमजोर नस यानी देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से उन लैटिन अमेरिकी नेताओं का खुलकर साथ देते रहे हैं जो उनकी तारीफ करते हैं। इनमें चिली के जोस एंटोनियो कास्ट, अर्जेंटीना के जेवियर माइली और इक्वाडोर के डैनियल नोबोआ शामिल हैं। अपने पिता की तरह फ्लावियो बोल्सोनारो भी चाहते हैं कि ब्राजील चीन से नाता तोड़े। वह अमेरिका को ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनाना चाहते हैं। साओ पाउलो की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्लोस मेलो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन हमेशा से ब्राजील में एक ऐसा उम्मीदवार चाहता था, जो आर्थिक मोर्चे पर उनके फायदे के लिए काम कर सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed