जींद। जहां एक तरफ सरकार अस्पतालों में जच्चा-बच्चा को सुविधाएं देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली लाइन में खराबी की वजह से एक महिला की डिलीवरी मोबाइल की टार्च की रोशनी में करवाई गई। हालांकि सुबह से ही लाइन खराब होने का पता था, लेकिन समय रहते उसे ठीक नहीं करवाया जा सका। हालांकि जच्चा-बच्चा ठीक है, लेकिन किसी भी बड़ी अनहोनी के घटित होने से इंकार नहीं किया जा सकता था।
रविवार देर शाम को गांव पौली की कमल को डिलीवरी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुलाना में भर्ती कराया गया। कमल के पति धर्मेंद्र ने बताया कि प्रसूति गृह में लाइट न होने के कारण स्वास्थ्य कर्मियों ने मोबाइल की लाइट जलाकर नाममात्र की रोशनी में ही उसकी पत्नी की डिलीवरी कराई। जब तक बच्चा इस दुनिया में नहीं आ गया, उनकी धड़कनें बढ़ी रही। डिलीवरी करने वाली नर्स से परिजनों ने इस पर बात की तो उन्होंने बताया कि लाइट खराब होने के कारण ही इस प्रकार डिलीवरी करनी पड़ी, इससे उनको थोड़ी बहुत परेशानी तो हुई, लेकिन बच्चा और मां अब दोनों ही सुरक्षित हैं। बिजली नहीं होने को लेकर इस बारे में उनके द्वारा अपने अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया था।
इलेक्ट्रिशियन नहीं कर पाया ठीक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डा भंवर सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लाइट सुबह से खराब थी। इसे इलेक्ट्रिशियन को दिखाया गया था। लाइन ज्यादा खराब होने के कारण ठीक नहीं हो सकी है। जल्द ही बिजली की लाइन को ठीक करवा दिया जाएगा।
पहला मामला नहीं है
चिकित्सा संस्थानों में लाइट न होने पर लापरवाही बरतने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कुरुक्षेत्र में ऐसा केस सामने आ चुका है। वहीं, जींद अस्पताल में भी कई बार गर्भवती महिलाओं के परिजन लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर चुके हैं।