ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 13 Dec 2021 10:28 AM IST
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह 1962 में पहला चुनाव हार गए थे, लेकिन उसी चुनाव से उनकी प्रभावी नेता की छवि बन गई थी। अतरौली के भाजपा कार्यकर्ता ब्रजेश शर्मा बताते हैं, 1962 के चुनाव में ‘बाबूजी’ जब पहली बार मैदान में उतरे तो उन्हें दीपक चुनाव चिह्न मिला।
उनके विपक्षी बाबू सिंह को बरगद का पेड़, कांग्रेस प्रत्याशी को चरखा और एक निर्दलीय को गुलाब का फूल चुनाव चिह्न मिला। सभी दलों के प्रत्याशियों ने चुनावी रैली निकाली। मजेदार बात रही कि बाबू सिंह ने बरगद का पौधा तो कांग्रेस ने चरखा और निर्दलीय प्रत्याशी ने गुलाब के फूलों के साथ रैली निकाली।
इस सबको देखते हुए कल्याण सिंह के समर्थक भी विचार-विमर्श में जुटे हुए थे कि क्या किया जाए। बहरहाल, प्रतिद्वंद्वियों को जवाब देने के लिए कल्याण सिंह ने भारत माता की तस्वीर लगाकर रथ सजाया, उस पर दीपक जलाए और समर्थकों ने हाथों में दीपक लेकर जुलूस निकाला।
शाम के धुंधलके में झिलमिलाते दीपकों के साथ निकले इस विशाल जुलूस ने अतरौली के लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। बेशक वे चुनाव हार गए, लेकिन कस्बे में उनकी प्रभावी नेता की पहचान बन गई।