‘लली कीरत ने जाई सबेरे-सबेरे, बाजे बधाई सबेरे-सबेरे’। आखिर परम आनंद की वो घड़ी आ ही गई, जिसका लाखों भक्तों को बेसब्री से इंतजार था। गुरुवार की मध्य रात्रि से ही लाड़िली जी मंदिर में राधा जन्म को लेकर भक्त उल्लास से सराबोर थे।
बधाई गायन के स्वरों पर थिरकते भक्तगण राधा के जन्म को लेकर आतुर हो चले। भोर की बेला में सुबह चार बजे श्यामजू का प्राकट्य अभिषेक हुआ। लाखों भक्त इस अद्भुत नजारे के साक्षी बने।
गुरुवार देर रात से ही बरसाने में श्रीराधा रानी के जन्मोत्सव का उल्लास शिखर पर था। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुआें के लाखों कदम लाड़िली जी मंदिर की ओर बढ़े चले जा रहे थे। श्रद्धालुओं के सैलाब के आगे व्यवस्थाएं भी बौनी साबित हुईं। हर पल-पल जन्म की शुभ वेला की बेसब्री थी। सुबह प्राकट्य के साथ ही बधाई गायन शुरू हो गया। मंदिरों में जगह-जगह उत्सव मनाए जाने लगे। बधाई के साथ ही उपहार लुटाए गए।
इन्हें पाने के लिए भक्तों में होड़ मच गई। शुक्रवार को अभिषेक होने के बाद शाम को महारानी ने छतरी से भक्तों पर कृपा बरसाई। किशोरी जू साल में तीन बार छतरी पर पधारती हैं। गोस्वामी समाज की विवाहित कन्या ने महाआरती की।
कदम-कदम पर श्रद्धालुओं का स्वागत
बरसाना में राधारानी जन्म पर सैकड़ों की संख्या में भंडारे आयोजित किए गए। कदम-कदम पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए जलपान, प्रसाद की स्टॉल लगी।
सखियां बनीं आकर्षण का केंद्र
लाड़िलीजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सोलह शृंगार करके आई सखियां थिरकती रहीं। इनका नृत्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
रात भर मनाया गया उत्सव
रात भर मंदिर में जन्मोत्सव की खुशी में बधाई गायन का दौर चला। बरसाने के गोस्वामी समाज ने किशोरी जू के जन्म से कुछ घंटे पहले ही बधाई गायन शुरू कर दिया था। वहीं मंदिर में इस बार सोने के शीश महल से राधारानी ने दर्शन दिए।
उत्सव के दौरान जेबकतरों की बल्ले
मेले के दौरान जेबकतरों और चेन स्नेचरों ने श्रद्धालुओं के पर्स, नगदी, सोने की चेन पर हाथ साफ कर दिया।
...कीरत कूख अवतरी कन्या सुंदरता का सार
राधारानी के गांव रावल में श्रीजी के जन्मोत्सव की धूम रही। गांव की गलियों में उल्लास छाया रहा हर कोई इस आनंद को हासिल करने को उत्सुक थी।
शुक्रवार भोर से ही रावल के राधारानी मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों की कतार लग गई। गांव के लोग भी इस उत्सव में शामिल होेने को उतावले दिखे। सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सेवायत ललित मोहन कल्ला, कार्र्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने जन्माभिषेक किया। प्राकट्य अभिषेक के बाद मंदिर में बधाई गायन शुरू हुआ। ‘प्रकट्यौ सब ब्रज कौ शृंगार, कीरत कूख अवतरी कन्या सुंदरता का सार, नख शिख रूप कहां लौ बरनौ, कोटिक मन बलिहार, परम आनंद वृषभान नंदनी, जोरि नंदकुमार’ बधाई गायन में श्रद्धालु नाचते-गाते एक दूसरे को बधाई देते रहे।