मेरठ। डाक विभाग के अफसर द्वारा किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में जद्दोजहद के बाद मुकदमा तो दर्ज हो गया, लेकिन पुलिस अब भी मामले को दबाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि किशोरी मेडिकल कराने से कतरा रही है। वहीं, अटकलों का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो ऐसा लगता है कि किशोरी किसी साजिश का शिकार हो गई है। गौर करने की बात यह भी है कि जो पुलिस पहले केस दर्ज करने में 15 दिन लगाती है, वही महज 48 घंटे में यह कहने लगी कि पीड़िता मेडिकल नहीं कराना चाहती।
दरअसल, महिला थाने की पुलिस शुक्रवार को किशोरी के घर गई तो वह घर पर नहीं थी। जबकि भाजपा नेता सुनील भराला उसके घर गये तो वह मौजूद तो थी, लेकिन मदद के नाम पर बदनामी की बात कह कर भराला को परिजनों ने चुप करा दिया। वहीं, जब महिला थाने की पुलिस ने फोन लगाया तो उसने बताया कि वह पिता के साथ बाहर गई है। शनिवार को दो बार महिला थाने की फोर्स किशोरी के घर गई। उसकी मां तो मौजूद थी लेकिन किशोरी का पता नहीं।
नानी की तबियत ठीक होने पर कराएगी मेडिकल :
पुलिस ने किशोरी की मां पर नियम कानून का दबाव बनाया तो उसकी मां ने मोबाइल पर बात कराई। किशोरी ने कहा कि जब उसकी नानी की तबियत ठीक हो जाएगी तब वह मेडिकल कराने के बारे में सोचेगी। ऐसे में यह आशंका है कि कहीं किशोरी अफसर के दबाव में तो ऐसा नहीं कर रही। उधर, सीओ मनीषा सिंह ने कहा कि किशोरी का मेडिकल परीक्षण कराये जाने के लिए एसओ महिला को निर्देश दिया गया है। वह किशोरी के परिजनों के संपर्क में है।