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गंगा के नाम पर धंधा कर रही सरकार-राजेंद्र सिंह

Varanasi Updated Thu, 17 Jul 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। सरकार गंगा के नाम पर सरकार धंधा करना चाहती है। यह बात रैमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कही। राजघाट स्थित सर्वसेवा संघ परिसर में बुधवार की शाम हुई निषाद समाज की सभा में उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में गंगा की सफाई के लिए 22 सौ और गंगा में बैराज बनाने के लिए 24 सौ करोड़ रुपयों की व्यवस्था की गई है। इससे जाहिर है कि केंद्र की दिलचस्पी गंगा की सफाई और सेहत सुधारने में कम ही है। इस मौके पर 19 जुलाई को अस्सी घाट पर गिर रहे नाले को बंद करके आंदोलन की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती नदी के किनारी की जमीन डेढ़ लाख रुपये वर्ग मीटर की दर से निजी कंपनियों को दे दी। अब गंगा के साथ भी ऐसा ही कुछ करने की तैयारी चल रही है। गंगा के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करना जरूरी है। गंगा के नाम पर विश्व बैंक और अन्य देश काफी पैसा देते हैं। सरकार इस विदेशी पैसे का जिक्र तक नहीं करती है। गंगा स्वच्छ तभी रहेगी जब उसमें सीवर और नालों का पानी गिरने से रोका जाए। धरती के पेट से जब बेतहाशा जल निकाला जाता है तो नदियां सूखने लगती हैं। इस बात का हमें ध्यान रखना होगा। संघ के पूर्व संयोजक रामधीरज ने कहा कि गंगा की सफाई का काम बड़ी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। इससे आशंका है कि आने वाले दिनों में स्नान करने पर भी शुल्क लग जाएगा। इस दौरान निर्णय लिया गया कि गंगा सफाई के लिए 19 जुलाई को अधिक से अधिक संख्या में जुट कर अस्सी घाट पर गिर रहे नाले को बंद कराने का संकल्प लिया जाएगा। इस दौरान रामधीरज, जागृति राही, कमलेश यादव, विकास सिंह चौहान, संजय सिंह, किरन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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