{"_id":"6a173ef0b918e9cc9f05c345","slug":"devotees-rejoiced-in-the-devotion-of-lord-krishna-the-marriage-of-krishna-and-rukmini-captivated-the-audience-azamgarh-news-c-258-1-azm1021-150928-2026-05-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: कान्हा की भक्ति में झूमे श्रद्धालु, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा समा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: कान्हा की भक्ति में झूमे श्रद्धालु, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा समा
विज्ञापन
जहानागंज के तुलसीपुर में श्री हनुमत महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रीकृष्ण और र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जहानागंज। तुलसीपुर गांव में स्व. डॉ. मंगला सिंह की स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्री हनुमत महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। वृंदावन से पधारे स्वामी चित्यप्रकाशानंद महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण पूर्ण ब्रह्म हैं और उनके अनेकों स्वरूप हैं।
जो जिस भाव से उन्हें स्मरण करता है, भगवान उसी रूप में दर्शन देते हैं। उन्होंने कहा कि जो कान्हा को जान गया, वह उनका दीवाना हो गया। श्रीमद्भागवत को सद्गुणों और सदविचारों का अथाह सागर बताते हुए कहा कि जो जितनी गहराई से इसमें डुबकी लगाता है, उसे उतना ही आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।
वहीं साध्वी अपराजिता ने कहा कि परमात्मा प्रकाश का स्वरूप हैं और उनके साक्षात्कार के लिए दिव्य ज्ञान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मनुष्य अक्सर मोह-माया और अहंकार में फंसकर अपने कर्मों को ही सब कुछ मान बैठता है, जबकि वास्तव में सब कुछ ईश्वर की कृपा से संचालित होता है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का सजीव मंचन किया गया।
विज्ञापन
जैसे ही जयमाल का दृश्य प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया और श्रद्धालु झूमकर नाचने लगे। इस दौरान ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, शैलेंद्र यादव, कमलाकर उर्फ शनि सिंह, डॉ. आलोक पांडेय, मीनू सिंह, प्रवीण कुंवर सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन शिक्षक कमलेश राय ने किया।
जो जिस भाव से उन्हें स्मरण करता है, भगवान उसी रूप में दर्शन देते हैं। उन्होंने कहा कि जो कान्हा को जान गया, वह उनका दीवाना हो गया। श्रीमद्भागवत को सद्गुणों और सदविचारों का अथाह सागर बताते हुए कहा कि जो जितनी गहराई से इसमें डुबकी लगाता है, उसे उतना ही आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं साध्वी अपराजिता ने कहा कि परमात्मा प्रकाश का स्वरूप हैं और उनके साक्षात्कार के लिए दिव्य ज्ञान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मनुष्य अक्सर मोह-माया और अहंकार में फंसकर अपने कर्मों को ही सब कुछ मान बैठता है, जबकि वास्तव में सब कुछ ईश्वर की कृपा से संचालित होता है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का सजीव मंचन किया गया।
Trending Videos
जैसे ही जयमाल का दृश्य प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया और श्रद्धालु झूमकर नाचने लगे। इस दौरान ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, शैलेंद्र यादव, कमलाकर उर्फ शनि सिंह, डॉ. आलोक पांडेय, मीनू सिंह, प्रवीण कुंवर सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन शिक्षक कमलेश राय ने किया।