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Hamirpur News: बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के बाद पिलर नंबर पांच के मलबे से उठे नए सवाल
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हमीरपुर। पुल हादसे के बाद शुरू हुई जांच का सबसे बड़ा केंद्र पिलर नंबर पांच बन गया है। करीब 37 मीटर गहरी नींव और करीब 8.66 मीटर परिधि वाले इस पिलर की क्षति ने तकनीकी विशेषज्ञों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण सामग्री में कंक्रीट से लेकर सरिया के जोड़, बड़े कंकड़ के अलावा भी बहुत कुछ जांच के दायरे में है।
अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) सुरेश कुमार की मौजूदगी में राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह ने घटनास्थल से साक्ष्य संकलित किए हैं। टीम ने सबसे अधिक समय हादसे में सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए पिलर-5 और उसके आसपास बिखरे मलबे की जांच में लगाया। जांच के दौरान टूटे पिलर में बाहर निकली सरिया, उसके जोड़ वाले हिस्सों और कंक्रीट की परतों का बारीकी से परीक्षण किया गया। टीम ने पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए।
जांच के दौरान मलबे और टूटे कंक्रीट के हिस्सों में बड़े आकार के कंकड़ भी दिखाई दिए। स्थानीय ग्रामीण और कुछ श्रमिक पहले से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में प्रयुक्त मौरंग और रेत की गुणवत्ता की पर्याप्त जांच नहीं हुई। हालांकि विशेषज्ञ टीम ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं दिया और कहा कि नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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निरीक्षण के दौरान एडीएम सुरेश कुमार ने विशेषज्ञों का ध्यान टूटे हिस्से में दिखाई दे रही सरिया और उसके जोड़ वाले स्थानों की ओर भी दिलाया। इसके बाद टीम ने उन हिस्सों को भी परीक्षण के दायरे में शामिल किया। मौके से जुटाए गए नमूनों को परीक्षण के लिए आईआईटी भेजे जाने की तैयारी है।
राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने बताया कि कंक्रीट और स्टील के नमूने लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। वहीं चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित ने कहा कि कंक्रीट की स्ट्रेंथ, स्टील की गुणवत्ता और अन्य निर्माण सामग्री की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे में प्राकृतिक कारणों की भूमिका अधिक थी या कोई अन्य तकनीकी कारण भी जिम्मेदार था।
हादसे के बाद अब सवाल केवल 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली आंधी तक सीमित नहीं रह गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि पिलर-5 को इतनी गंभीर क्षति आखिर कैसे पहुंची, गिरते हुए सेगमेंटों का प्रभाव कितना था और निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
क्या हैं निर्माण के मानक
निर्माण कार्य से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि किसी भी बड़े पुल निर्माण में प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि कंक्रीट मिश्रण में बड़े आकार के अवांछित कंकड़ नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार अत्यधिक जंग लगी सरिया का उपयोग भी तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। अधिकारी के अनुसार निर्माण सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल प्रयोगशाला जांच से ही संभव है। हादसाग्रस्त पियर से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अधिकारियों का कहना है कि कंक्रीट, एग्रीगेट और स्टील की गुणवत्ता की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण सामग्री पूरी तरह मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
पिलर-5 ही नहीं निगरानी व्यवस्था भी जांच के घेरे में
छह मजदूरों की जान लेने वाले हादसे के बाद अब जांच केवल टूटे पिलर-5 तक सीमित नहीं रह गई है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण, प्री-स्ट्रेसिंग की स्थिति और निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चूंकि परियोजना का तकनीकी पर्यवेक्षण राज्य सेतु निगम के जिम्मे था इसलिए हादसे के साथ उसकी निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
जांच रिपोर्ट बताएगी वजह आंधी या कमजोर संरचना
हादसे के बाद दो सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला क्या 110 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की आंधी ही हादसे की पूरी तरह जिम्मेदार रही। दूसरा सवाल क्या निर्माणाधीन संरचना और उसमें प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मजबूती के मानकों पर खरी रही है। इन सवालों के जवाब अब आईआईटी में होने वाली तकनीकी जांच और विशेषज्ञ रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएंगे।
निष्पक्ष जांच पर टिकीं छह परिवारों की उम्मीदें
पुल हादसे में जान गंवाने वाले छह मजदूरों के परिजनों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। स्वासा खुर्द के राजेंद्र सिंह का कहना है कि मैनें इस हादसे में अपना बेटा खो दिया है। इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो तभी मन को शांति मिलेगी। हादसे की वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और किसी भी स्तर पर दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि निर्माण में कहीं भी लापरवाही या मानकों से समझौता हुआ है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। परिवारों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) सुरेश कुमार की मौजूदगी में राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह ने घटनास्थल से साक्ष्य संकलित किए हैं। टीम ने सबसे अधिक समय हादसे में सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए पिलर-5 और उसके आसपास बिखरे मलबे की जांच में लगाया। जांच के दौरान टूटे पिलर में बाहर निकली सरिया, उसके जोड़ वाले हिस्सों और कंक्रीट की परतों का बारीकी से परीक्षण किया गया। टीम ने पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए।
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जांच के दौरान मलबे और टूटे कंक्रीट के हिस्सों में बड़े आकार के कंकड़ भी दिखाई दिए। स्थानीय ग्रामीण और कुछ श्रमिक पहले से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में प्रयुक्त मौरंग और रेत की गुणवत्ता की पर्याप्त जांच नहीं हुई। हालांकि विशेषज्ञ टीम ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं दिया और कहा कि नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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निरीक्षण के दौरान एडीएम सुरेश कुमार ने विशेषज्ञों का ध्यान टूटे हिस्से में दिखाई दे रही सरिया और उसके जोड़ वाले स्थानों की ओर भी दिलाया। इसके बाद टीम ने उन हिस्सों को भी परीक्षण के दायरे में शामिल किया। मौके से जुटाए गए नमूनों को परीक्षण के लिए आईआईटी भेजे जाने की तैयारी है।
राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने बताया कि कंक्रीट और स्टील के नमूने लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। वहीं चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित ने कहा कि कंक्रीट की स्ट्रेंथ, स्टील की गुणवत्ता और अन्य निर्माण सामग्री की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे में प्राकृतिक कारणों की भूमिका अधिक थी या कोई अन्य तकनीकी कारण भी जिम्मेदार था।
हादसे के बाद अब सवाल केवल 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली आंधी तक सीमित नहीं रह गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि पिलर-5 को इतनी गंभीर क्षति आखिर कैसे पहुंची, गिरते हुए सेगमेंटों का प्रभाव कितना था और निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
क्या हैं निर्माण के मानक
निर्माण कार्य से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि किसी भी बड़े पुल निर्माण में प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि कंक्रीट मिश्रण में बड़े आकार के अवांछित कंकड़ नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार अत्यधिक जंग लगी सरिया का उपयोग भी तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। अधिकारी के अनुसार निर्माण सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल प्रयोगशाला जांच से ही संभव है। हादसाग्रस्त पियर से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अधिकारियों का कहना है कि कंक्रीट, एग्रीगेट और स्टील की गुणवत्ता की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण सामग्री पूरी तरह मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
पिलर-5 ही नहीं निगरानी व्यवस्था भी जांच के घेरे में
छह मजदूरों की जान लेने वाले हादसे के बाद अब जांच केवल टूटे पिलर-5 तक सीमित नहीं रह गई है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण, प्री-स्ट्रेसिंग की स्थिति और निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चूंकि परियोजना का तकनीकी पर्यवेक्षण राज्य सेतु निगम के जिम्मे था इसलिए हादसे के साथ उसकी निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
जांच रिपोर्ट बताएगी वजह आंधी या कमजोर संरचना
हादसे के बाद दो सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला क्या 110 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की आंधी ही हादसे की पूरी तरह जिम्मेदार रही। दूसरा सवाल क्या निर्माणाधीन संरचना और उसमें प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मजबूती के मानकों पर खरी रही है। इन सवालों के जवाब अब आईआईटी में होने वाली तकनीकी जांच और विशेषज्ञ रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएंगे।
निष्पक्ष जांच पर टिकीं छह परिवारों की उम्मीदें
पुल हादसे में जान गंवाने वाले छह मजदूरों के परिजनों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। स्वासा खुर्द के राजेंद्र सिंह का कहना है कि मैनें इस हादसे में अपना बेटा खो दिया है। इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो तभी मन को शांति मिलेगी। हादसे की वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और किसी भी स्तर पर दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि निर्माण में कहीं भी लापरवाही या मानकों से समझौता हुआ है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। परिवारों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।