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गोवंशों की हालत देखने लायक नहीं, खुल गई हिन्दुत्व की कलई : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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हमीरपुर। गोशाला में गोवंशों की हालत देखने लायक नहीं है। 12 साल बीत जाएं या 18 साल वह गोमाता की रक्षा नहीं कर पाए। 14 साल तक गाय माता है और फिर शाकभाजी। उन्हें गाय का मांस खाने वालों के वोट चाहिए। सच तो यह है कि उनके हिंदुत्व की कलई खुल गई है। यह बातें गुरुवार को शहर आए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध गविष्टि यात्रा लेकर निकले शंकराचार्य शहर में पांच घंटे विलंब से पहुंचे।
कार्यक्रम स्थल पातालेश्वर मंदिर में उनका जोरदार अभिनंदन हुआ। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करने के बाद वह सीधे मंच पर पहुंचे। यहां पर उनका पादुका पूजन हुआ। यहां पर वह करीब 35 मिनट तक रहे। सूर्यास्त जाने की वजह से उन्होंने यहां मौन धारण कर लिया था। उन्होंने अपने शिष्यों को आशीर्वाद दिया। इसके पहले यमुना पुल पर उनका अभिनंदन करने उनके अनुयायी पहुंचे। यहां पर उन्होंने कहा कि गाय की स्थिति पूरे देश में बहुत खराब है। जो आशा थी उसके विपरीत काम हुआ। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने कहा कि 14 साल तक माता है और फिर शाक भाजी, यही स्थिति असम में है वहां के मुख्यमंत्री को गाय का मांस खाने वालों का वोट चाहिए। इनके हिंदुत्व की कलई खुल गई है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नमाज सड़क पर नहीं पढ़ी जानी चाहिए। यह पवित्र स्थान पर पढ़ने का विषय है और सड़क पवित्र स्थान नहीं है। कार्यक्रम स्थल पर एक अनुयायी ने अपनी बेटी के नामकरण करने का आग्रह किया। इस पर शंकराचार्य ने इशारा किया और उनके शिष्य ने शिवांगी नाम दिया। इसके बाद उन्होंने शिवांगी को गले से मखाने का माला उतार कर पहनाया। इस मौके पर महामंडलेश्वर राजेंद्र दास महाराज, साध्वी जगदंबा, बृजेश कुमार बादल, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष दीपा तिवारी, जुगल किशोर तिवारी, कौशल महाराज, युगांक मिश्रा, उज्जवल पाठक, बउआ ठाकुर, अशोक निषाद गुरु, रमाकांत शुक्ला, अत्री शर्मा, विवेक मिश्रा, अमित तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम स्थल पातालेश्वर मंदिर में उनका जोरदार अभिनंदन हुआ। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करने के बाद वह सीधे मंच पर पहुंचे। यहां पर उनका पादुका पूजन हुआ। यहां पर वह करीब 35 मिनट तक रहे। सूर्यास्त जाने की वजह से उन्होंने यहां मौन धारण कर लिया था। उन्होंने अपने शिष्यों को आशीर्वाद दिया। इसके पहले यमुना पुल पर उनका अभिनंदन करने उनके अनुयायी पहुंचे। यहां पर उन्होंने कहा कि गाय की स्थिति पूरे देश में बहुत खराब है। जो आशा थी उसके विपरीत काम हुआ। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने कहा कि 14 साल तक माता है और फिर शाक भाजी, यही स्थिति असम में है वहां के मुख्यमंत्री को गाय का मांस खाने वालों का वोट चाहिए। इनके हिंदुत्व की कलई खुल गई है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नमाज सड़क पर नहीं पढ़ी जानी चाहिए। यह पवित्र स्थान पर पढ़ने का विषय है और सड़क पवित्र स्थान नहीं है। कार्यक्रम स्थल पर एक अनुयायी ने अपनी बेटी के नामकरण करने का आग्रह किया। इस पर शंकराचार्य ने इशारा किया और उनके शिष्य ने शिवांगी नाम दिया। इसके बाद उन्होंने शिवांगी को गले से मखाने का माला उतार कर पहनाया। इस मौके पर महामंडलेश्वर राजेंद्र दास महाराज, साध्वी जगदंबा, बृजेश कुमार बादल, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष दीपा तिवारी, जुगल किशोर तिवारी, कौशल महाराज, युगांक मिश्रा, उज्जवल पाठक, बउआ ठाकुर, अशोक निषाद गुरु, रमाकांत शुक्ला, अत्री शर्मा, विवेक मिश्रा, अमित तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।