{"_id":"6a1ded3b7159f611540795ec","slug":"due-to-the-breakage-of-the-canal-the-water-of-the-gandak-canal-is-not-reaching-20-thousand-hectares-of-fields-maharajganj-news-c-206-1-go11002-178436-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: चकनाली टूटने से 20 हजार हेक्टेयर खेतों तक नहीं पहुंच रहा गंडक नहर का पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: चकनाली टूटने से 20 हजार हेक्टेयर खेतों तक नहीं पहुंच रहा गंडक नहर का पानी
विज्ञापन
शिकारपुर तक पहुंचा देवरिया शाखा नहर में पानी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ध्वस्त हो चुकी हैं चक नालियां, प्यासे हैं खेत, 2012 से ग्राम पंचायतों को देखरेख का जिम्मा
जनपद में लगभग 40 किमी लंबी नहर से बनाए गए थे 2009 चकनाली व कुलावे, अधिकतर हो चुके हैं ध्वस्त
महराजगंज। गंडक नहर परियोजना से निकली देवरिया शाखा की नहर कभी तीन ब्लाकों के लिए वरदान थी लेकिन आज यह अनुपयोगी बनकर रह गई है। 20 हजार हेक्टेयर खेत को सींचने के लिए जनपद में लगभग 40 किमी लंबी नहर से 2009 चकनाली व कुलावे बनाए गए थे। इससे नहर का पानी दो किमी के दायरे तक के खेतों को सींचता था। 2012 में कुलावा व चकनाली देखभाल सिंचाई विभाग से ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया। इसके बाद चक नालियां ध्वस्त होती गईं। मौजूदा स्थिति यह है कि नहर शाखा में पानी तो आ चुका है लेकिन नहर से खेतों की सिंचाई नहीं हो रही है।
गंडक नहर देवरिया शाखा में पानी तो आ गया लेकिन नहर में पानी आने के बाद किसानों की परेशानी बरकरार है। नहर से निकली चक नालियां ध्वस्त होने के कारण नहर से सटे किसानों के खेत प्यासे रह जाते हैं क्योंकि खेतों तक सिंचाई के लिए पानी ही नहीं पहुंच पाता है। सिल्ट व गाद की सफाई नियमित न होने से नहर का प्रवाह भी मंद पड़ता जा रहा है।
जिसके चलते टेल तक पानी पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में नहर का होना या न होना दोनों किसानों के लिए बेमतलब है। कारण कि अधिकतर सिंचाई कार्य उन्हें पंपिंग सेट से ही पूरी करनी पड़ती। बस्ती मंडल के लिए जो स्थान सरयू नहर परियोजना का है वही स्थान गोरखपुर में गंडक नहर परियोजना की है। नहरें खराब होने के कारण करीब एक लाख किसानों के खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
70 के दशक में गंडक नहर परियोजना का अंग बनकर उभरी देवरिया शाखा ने अपने शुरुआती दिनों में तो लगभग 2010 तक न सिर्फ महराजगंज जनपद, बल्कि गोरखपुर व देवरिया जनपद के बड़े भूभाग को सिंचाई सुविधा देने का कार्य बखूबी किया। इसके बाद दिन प्रतिदिन यह अपना महत्व खोती गई। यह क्रम आज तक बरकरार है।
सिंचाई विभाग को मांग के मुताबिक शासन की तरफ से धन भी नहीं उपलब्ध होता है। जिसकी वजह से यह नहर शाखा जहां सिल्ट व गाद से पटी है। ऐसे में नहर के ठीक सटे खेतों को ही किसान किसी तरह सींच पाते हैं नहर से दूरी वाले खेतों को पंपिंग सेट के सहारे ही सींचने की मजबूरी है।
जनपद के 40 किमी दायरे में 2009 चक नालियां
गंडक नहर की देवरिया शाखा बाल्मीकि नगर बैराज से निकलकर झुलनीपुर से जनपद में दाखिल होती। देवरिया शाखा की तरफ जाने वाली यह नहर निचलौल, सिसवां बाजार, शिकारपुर, परतावल से गोरखपुर होते हुए देवरिया चली जाती हैं। जिले के दायरे में नहर से 2009 कुलावे व पक्की चक नालियां बनी थीं जिससे नहर से एक से दो किमी दूर के खेतों की सिंचाई किसान बड़े आराम से कर लेते थे, लेकिन लगभग डेढ़ दशक में हालात इतनी तेजी से बदले कि सभी चक नालियों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। इनमें महज 10-20 चक नालियों का अस्तित्व बचा है। अन्य स्थानों को देखकर यह अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता कि यहां कभी चक नालियां थीं।
परियोजना का हिस्सा हैं चार नहरें
सिंचाई विभाग के मुताबिक गंडक नहर परियोजना के अन्तर्गत गंडक नदी पर त्रिवेणी नहर हेड रेगुलेटर के नीचे बिहार के बाल्मीकि नगर में बैराज बनाया गया। इस बैराज से चार नहरें निकली हैं। जिसमें से दो नहरें भारत के बिहार व उत्तर प्रदेश राज्य तथा दो नहरें नेपाल राष्ट्र की तरफ जाती हैं। 256.68 किलोमीटर की पूर्वी नहर से बिहार के चम्पारन, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिलों के 6.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती है। इसी नहर से नेपाल के परसा, बाड़ा, रौतहट जिलों के 42 हजार हेक्टेयर भूमि भी सिंचित है। मुख्य पश्चिमी नहर से बिहार के सारन जिले की 4.84 लाख भूमि तथा उत्तर प्रदेश के महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर जिलों के 3.44 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती हैं।
क्या कहते हैं किसान
गंडक परियोजना की देवरिया शाखा से जनपद की कई छोटी नहरें निकली हैं। उद्देश्य था कि अधिक से अधिक खेतों तक गंडक नहर से सिंचाई हो, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण नहर बेमतलब साबित हो रही क्योंकि खेत तक पानी ले जाने की व्यवस्था नहीं है।
-सुग्रीव यादव, बरवां खुर्द, शिकारपुर
-- -- -- -- -- -- -- -- --
गंडक नहर की देवरिया साखा से तीन ब्लॉक क्षेत्र के किसान सहूलियत पाते थे। 2015 तक यह नहर उपयोगी रही लेकिन इसके बाद सिंचाई विभाग ने सिल्ट व गाद सफाई में लचरता व चकनाली का देखरेख बंद कर दिया। इसके बाद सिंचाई की यह सहूलियत छिनती गई।
-बृजेश कुमार पटेल, घुघली
-- -- -- -- -- -- --
गंडक परियोजना की नहरों पर बनी चक नालियां व कुलावे की देखरेख 2012 से विभाग शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायत व नगर निकाय को सौंप चुका है इसलिए चक नालियों की मेंटेनेंस विभाग नहीं कराता। सिल्ट व गाद की सफाई नहर पटरियों की मरम्मत आदि के लिए सीमित बजट जारी होता है। ऐसे में जहां अधिक सिल्ट जमा होता वहां समय-समय पर सफाई कराई जाती है।
-विनोद कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम, महराजगंज
-- -- -- -- -- -- -- -
ग्राम पंचायत के दायरे में आने वाली नहर से निकली चक नालियां अगर ध्वस्त हो रही हैं तो प्रस्ताव तैयार कराकर मनरेगा से मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए एडीओ पंचायत से प्रस्ताव लिया जाएगा।
- श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ, महराजगंज
जनपद में लगभग 40 किमी लंबी नहर से बनाए गए थे 2009 चकनाली व कुलावे, अधिकतर हो चुके हैं ध्वस्त
महराजगंज। गंडक नहर परियोजना से निकली देवरिया शाखा की नहर कभी तीन ब्लाकों के लिए वरदान थी लेकिन आज यह अनुपयोगी बनकर रह गई है। 20 हजार हेक्टेयर खेत को सींचने के लिए जनपद में लगभग 40 किमी लंबी नहर से 2009 चकनाली व कुलावे बनाए गए थे। इससे नहर का पानी दो किमी के दायरे तक के खेतों को सींचता था। 2012 में कुलावा व चकनाली देखभाल सिंचाई विभाग से ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया। इसके बाद चक नालियां ध्वस्त होती गईं। मौजूदा स्थिति यह है कि नहर शाखा में पानी तो आ चुका है लेकिन नहर से खेतों की सिंचाई नहीं हो रही है।
गंडक नहर देवरिया शाखा में पानी तो आ गया लेकिन नहर में पानी आने के बाद किसानों की परेशानी बरकरार है। नहर से निकली चक नालियां ध्वस्त होने के कारण नहर से सटे किसानों के खेत प्यासे रह जाते हैं क्योंकि खेतों तक सिंचाई के लिए पानी ही नहीं पहुंच पाता है। सिल्ट व गाद की सफाई नियमित न होने से नहर का प्रवाह भी मंद पड़ता जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिसके चलते टेल तक पानी पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में नहर का होना या न होना दोनों किसानों के लिए बेमतलब है। कारण कि अधिकतर सिंचाई कार्य उन्हें पंपिंग सेट से ही पूरी करनी पड़ती। बस्ती मंडल के लिए जो स्थान सरयू नहर परियोजना का है वही स्थान गोरखपुर में गंडक नहर परियोजना की है। नहरें खराब होने के कारण करीब एक लाख किसानों के खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
Trending Videos
70 के दशक में गंडक नहर परियोजना का अंग बनकर उभरी देवरिया शाखा ने अपने शुरुआती दिनों में तो लगभग 2010 तक न सिर्फ महराजगंज जनपद, बल्कि गोरखपुर व देवरिया जनपद के बड़े भूभाग को सिंचाई सुविधा देने का कार्य बखूबी किया। इसके बाद दिन प्रतिदिन यह अपना महत्व खोती गई। यह क्रम आज तक बरकरार है।
सिंचाई विभाग को मांग के मुताबिक शासन की तरफ से धन भी नहीं उपलब्ध होता है। जिसकी वजह से यह नहर शाखा जहां सिल्ट व गाद से पटी है। ऐसे में नहर के ठीक सटे खेतों को ही किसान किसी तरह सींच पाते हैं नहर से दूरी वाले खेतों को पंपिंग सेट के सहारे ही सींचने की मजबूरी है।
जनपद के 40 किमी दायरे में 2009 चक नालियां
गंडक नहर की देवरिया शाखा बाल्मीकि नगर बैराज से निकलकर झुलनीपुर से जनपद में दाखिल होती। देवरिया शाखा की तरफ जाने वाली यह नहर निचलौल, सिसवां बाजार, शिकारपुर, परतावल से गोरखपुर होते हुए देवरिया चली जाती हैं। जिले के दायरे में नहर से 2009 कुलावे व पक्की चक नालियां बनी थीं जिससे नहर से एक से दो किमी दूर के खेतों की सिंचाई किसान बड़े आराम से कर लेते थे, लेकिन लगभग डेढ़ दशक में हालात इतनी तेजी से बदले कि सभी चक नालियों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। इनमें महज 10-20 चक नालियों का अस्तित्व बचा है। अन्य स्थानों को देखकर यह अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता कि यहां कभी चक नालियां थीं।
परियोजना का हिस्सा हैं चार नहरें
सिंचाई विभाग के मुताबिक गंडक नहर परियोजना के अन्तर्गत गंडक नदी पर त्रिवेणी नहर हेड रेगुलेटर के नीचे बिहार के बाल्मीकि नगर में बैराज बनाया गया। इस बैराज से चार नहरें निकली हैं। जिसमें से दो नहरें भारत के बिहार व उत्तर प्रदेश राज्य तथा दो नहरें नेपाल राष्ट्र की तरफ जाती हैं। 256.68 किलोमीटर की पूर्वी नहर से बिहार के चम्पारन, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिलों के 6.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती है। इसी नहर से नेपाल के परसा, बाड़ा, रौतहट जिलों के 42 हजार हेक्टेयर भूमि भी सिंचित है। मुख्य पश्चिमी नहर से बिहार के सारन जिले की 4.84 लाख भूमि तथा उत्तर प्रदेश के महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर जिलों के 3.44 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती हैं।
क्या कहते हैं किसान
गंडक परियोजना की देवरिया शाखा से जनपद की कई छोटी नहरें निकली हैं। उद्देश्य था कि अधिक से अधिक खेतों तक गंडक नहर से सिंचाई हो, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण नहर बेमतलब साबित हो रही क्योंकि खेत तक पानी ले जाने की व्यवस्था नहीं है।
-सुग्रीव यादव, बरवां खुर्द, शिकारपुर
गंडक नहर की देवरिया साखा से तीन ब्लॉक क्षेत्र के किसान सहूलियत पाते थे। 2015 तक यह नहर उपयोगी रही लेकिन इसके बाद सिंचाई विभाग ने सिल्ट व गाद सफाई में लचरता व चकनाली का देखरेख बंद कर दिया। इसके बाद सिंचाई की यह सहूलियत छिनती गई।
-बृजेश कुमार पटेल, घुघली
गंडक परियोजना की नहरों पर बनी चक नालियां व कुलावे की देखरेख 2012 से विभाग शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायत व नगर निकाय को सौंप चुका है इसलिए चक नालियों की मेंटेनेंस विभाग नहीं कराता। सिल्ट व गाद की सफाई नहर पटरियों की मरम्मत आदि के लिए सीमित बजट जारी होता है। ऐसे में जहां अधिक सिल्ट जमा होता वहां समय-समय पर सफाई कराई जाती है।
-विनोद कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम, महराजगंज
ग्राम पंचायत के दायरे में आने वाली नहर से निकली चक नालियां अगर ध्वस्त हो रही हैं तो प्रस्ताव तैयार कराकर मनरेगा से मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए एडीओ पंचायत से प्रस्ताव लिया जाएगा।
- श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ, महराजगंज