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पोस्टमार्टम हाउस: डीप फ्रीजर न होने से जल्दी खराब हो रहे शव, हर दिन आते हैं पांच लाशें
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पोस्टमार्टम हाउस में गंदे स्ट्रेचर पर रखा शव। स्रोत- सोशल मीडिया
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परिजनों का आरोप- बिना फ्रीजर के रखे शवों में पड़ने लगते हैं कीड़े, अज्ञात शवों से आती है दुर्गंध
मिर्जापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में हर दिन आने वाली करीब पांच लाशें फ्रीजर नहीं रहने से गर्मी में जल्दी खराब हो जा रही हैं। पोस्टमार्टम कराने आने वाले परिजनों का आरोप है कि बिना फ्रीजर में रखे शवों में कीड़े पड़ने लगते हैं। बिना पहचान वाले शवों से दुर्गंध आती है।
मंडलीय अस्पताल के शवगृह में 11 मार्च को अभिषेक सैनी उर्फ किशन के शव को चूहों के काटे जाने का मामला सामने आने के बाद व्यवस्था में सुधार हुआ, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति अब भी बदतर है। डीप फ्रीजर न होने और कमरे में गंदगी से बॉडी डिकंपोज होने लगती है। हालत यह होती है कि दुर्गंध से पोस्टमार्टम हाउस के बाहर तक खड़ा होना मुश्किल होता है।
11 मार्च को मंडलीय अस्पताल के शवगृह में डीप फ्रीजर होने के बावजूद उसका संचालन न होने से अभिषेक के शव को चूहों ने कुतर दिया था। परिजनों के हंगामे के बाद इस मामले की जांच की गई। इसके बाद शवगृह का कायाकल्प किया गया। वहां साफ-सफाई कराई गई, खिड़की बदली गई और डीप फ्रीजर की संख्या बढ़ाकर सात शव रखने की व्यवस्था की गई।
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10 वर्ष पहले बना था पोस्टमार्टम हाउस
पोस्टमार्टम हाउस का नया भवन बने 10 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वहां डीप फ्रीजर नहीं है। इस कारण शवों को पुराने भवन के कमरे में रखा जाता है, जहां बिना फ्रीजर के स्ट्रेचर पर शव रखे जाते हैं। पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। प्रतिदिन चार से पांच शवों का पोस्टमार्टम होता है। सबसे अधिक दुर्दशा अज्ञात शवों की होती है। पहचान के लिए अज्ञात शवों को 72 घंटे तक रखा जाता है। गर्मी में बिना फ्रीजर के अज्ञात शवों से दुर्गंध आने लगती है। कभी-कभी उनमें कीड़े भी पड़ जाते हैं। परिजनों का कहना है कि जहां शव रखे जाते हैं, वहां इतनी गंदगी होती है कि जूतों में खून लग जाता है। 24 घंटे में शव खराब हो जाते हैं।
इनसेट
मई में 160 शवों का हुआ पोस्टमार्टम, इनमें 20 अज्ञात शव
मंडलीय अस्पताल के शवगृह में लाश को चूहों के कुतरने की घटना के बाद वहां सात शव रखने की व्यवस्था कर डीप फ्रीजर लगवाई गई। मई महीने में यहां 26 शव रखे गए। दूसरी ओर, पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। मई महीने में पोस्टमार्टम हाउस में 160 शवों का पोस्टमार्टम हुआ, इनमें 20 अज्ञात शव थे।
शवगृह का फ्रीजर पोस्टमार्टम हाउस में लगता तो रहती राहत
सांसद निधि से मिला डीप फ्रीजर मंडलीय अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया था। अब वहां मेडिकल कॉलेज की ओर से तीन और फ्रीजर उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वहां शव रखने की क्षमता सात हो गई है। मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन सामान्यतः एक शव रखने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। वहां प्रतिदिन पांच शव पहुंचते हैं। इनमें अज्ञात भी होते हैं। यदि एक-दो शव रखने के लिए भी पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रीजर उपलब्ध हो, तो समस्या कम हो सकती है।
परिजनों ने लगाया था शव खराब होने का आरोप
बिहार के नवादा निवासी दीपक ने बताया कि पिता कशोरी लाल महाबोधि एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। ट्रेन में मौत हो गई, शव को विंध्याचल स्टेशन पर रात में उतारा गया। वहां से शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अगले दिन जब वे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो शव फ्रीजर में नहीं रखा गया था। शव खराब हो गया था।
वर्जन
अस्पताल में आने के बाद जिन लोगों की मौत होती है और जिनका पोस्टमार्टम कराया जाा है, शवगृह में उनके शव रखे जाते हैं। सात शव रखने के लिए डीप फ्रीजर है।
डॉ. सचिन किशोर, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल
वर्जन
सांसद निधि से जो फ्रीजर मिला था, उसे मंडलीय अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। अस्पताल में मौत होने वाले शव वहां रखे जाते हैं। पोस्टमार्टम हाउस में आने वाले शवों को रखने के लिए डीप फ्रीजर की मांग शासन से की गई है। पत्र लिखा गया है। जनरेटर की भी मांग की गई है।
डॉ. सीएल वर्मा, सीएमओ
मिर्जापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में हर दिन आने वाली करीब पांच लाशें फ्रीजर नहीं रहने से गर्मी में जल्दी खराब हो जा रही हैं। पोस्टमार्टम कराने आने वाले परिजनों का आरोप है कि बिना फ्रीजर में रखे शवों में कीड़े पड़ने लगते हैं। बिना पहचान वाले शवों से दुर्गंध आती है।
मंडलीय अस्पताल के शवगृह में 11 मार्च को अभिषेक सैनी उर्फ किशन के शव को चूहों के काटे जाने का मामला सामने आने के बाद व्यवस्था में सुधार हुआ, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति अब भी बदतर है। डीप फ्रीजर न होने और कमरे में गंदगी से बॉडी डिकंपोज होने लगती है। हालत यह होती है कि दुर्गंध से पोस्टमार्टम हाउस के बाहर तक खड़ा होना मुश्किल होता है।
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11 मार्च को मंडलीय अस्पताल के शवगृह में डीप फ्रीजर होने के बावजूद उसका संचालन न होने से अभिषेक के शव को चूहों ने कुतर दिया था। परिजनों के हंगामे के बाद इस मामले की जांच की गई। इसके बाद शवगृह का कायाकल्प किया गया। वहां साफ-सफाई कराई गई, खिड़की बदली गई और डीप फ्रीजर की संख्या बढ़ाकर सात शव रखने की व्यवस्था की गई।
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पोस्टमार्टम हाउस का नया भवन बने 10 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वहां डीप फ्रीजर नहीं है। इस कारण शवों को पुराने भवन के कमरे में रखा जाता है, जहां बिना फ्रीजर के स्ट्रेचर पर शव रखे जाते हैं। पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। प्रतिदिन चार से पांच शवों का पोस्टमार्टम होता है। सबसे अधिक दुर्दशा अज्ञात शवों की होती है। पहचान के लिए अज्ञात शवों को 72 घंटे तक रखा जाता है। गर्मी में बिना फ्रीजर के अज्ञात शवों से दुर्गंध आने लगती है। कभी-कभी उनमें कीड़े भी पड़ जाते हैं। परिजनों का कहना है कि जहां शव रखे जाते हैं, वहां इतनी गंदगी होती है कि जूतों में खून लग जाता है। 24 घंटे में शव खराब हो जाते हैं।
इनसेट
मई में 160 शवों का हुआ पोस्टमार्टम, इनमें 20 अज्ञात शव
मंडलीय अस्पताल के शवगृह में लाश को चूहों के कुतरने की घटना के बाद वहां सात शव रखने की व्यवस्था कर डीप फ्रीजर लगवाई गई। मई महीने में यहां 26 शव रखे गए। दूसरी ओर, पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। मई महीने में पोस्टमार्टम हाउस में 160 शवों का पोस्टमार्टम हुआ, इनमें 20 अज्ञात शव थे।
शवगृह का फ्रीजर पोस्टमार्टम हाउस में लगता तो रहती राहत
सांसद निधि से मिला डीप फ्रीजर मंडलीय अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया था। अब वहां मेडिकल कॉलेज की ओर से तीन और फ्रीजर उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वहां शव रखने की क्षमता सात हो गई है। मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन सामान्यतः एक शव रखने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से शव आते हैं। वहां प्रतिदिन पांच शव पहुंचते हैं। इनमें अज्ञात भी होते हैं। यदि एक-दो शव रखने के लिए भी पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रीजर उपलब्ध हो, तो समस्या कम हो सकती है।
परिजनों ने लगाया था शव खराब होने का आरोप
बिहार के नवादा निवासी दीपक ने बताया कि पिता कशोरी लाल महाबोधि एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। ट्रेन में मौत हो गई, शव को विंध्याचल स्टेशन पर रात में उतारा गया। वहां से शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अगले दिन जब वे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो शव फ्रीजर में नहीं रखा गया था। शव खराब हो गया था।
वर्जन
अस्पताल में आने के बाद जिन लोगों की मौत होती है और जिनका पोस्टमार्टम कराया जाा है, शवगृह में उनके शव रखे जाते हैं। सात शव रखने के लिए डीप फ्रीजर है।
डॉ. सचिन किशोर, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल
वर्जन
सांसद निधि से जो फ्रीजर मिला था, उसे मंडलीय अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। अस्पताल में मौत होने वाले शव वहां रखे जाते हैं। पोस्टमार्टम हाउस में आने वाले शवों को रखने के लिए डीप फ्रीजर की मांग शासन से की गई है। पत्र लिखा गया है। जनरेटर की भी मांग की गई है।
डॉ. सीएल वर्मा, सीएमओ