करोड़ों केलैकफेड घोटाले मेंआरोपी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता।
गाजियाबाद की डासना जेल के अधीक्षक ने कोर्ट में रिपोर्ट भेजकर बताया कि 31 अक्तूबर को बाबू सिंह कुशवाहा को पेश नहीं किया जा सकता क्योंकि वह पीजीआई में भर्ती हैं।
विशेष न्यायाधीश वीके श्रीवास्तव ने जेल अधीक्षक की रिपोर्ट को पत्रावली में रखने का आदेश दिया है।
इससे पहले डासना जेल अधीक्षक ने कोर्ट को रिपोर्ट भेजकर पूर्व मंत्री को पेशी पर लाने में असमर्थता जताई।
उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह को गत 13 सितंबर को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया था।
चिकित्सकों ने डिस्चार्ज करते समय उन्हें फॉलोअप के लिए छह सप्ताह बाद नेफ्रोलॉजी व यूरोलॉजी विभाग में बुलाया था।
इस कारण 22 अक्तूबर को बाबू सिंह कुशवाहा को जांच व फॉलोअप के लिए पुलिस अभिरक्षा में पीजीआई भेजा गया था जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती कर लिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कारण भ्रष्टाचार निवारण अदालत द्वारा तय तारीख 31 अक्तूबर को उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है, 22 अक्तूबर को लैकफेड घोटाले की जांच कर रही पुलिस कोऑपरेटिव सेल की विशेष जांच शाखा ने एनआरएचएम घोटाले में डासना जेल में बंद पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा तथा फरार चल रहे लैकफेड के पूर्व चेयरमैन सुशील कटियार को आरोपी बनाकर अपनी पूरक चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी।
मामले के विवेचक ने पूर्व मंत्री के डासना जेल में बंद होने के कारण उन्हें बी वारंट के जरिए तलब करने की मांग की थी।
इस पर कोर्ट ने पुलिस कोऑपरेटिव सेल द्वारा पेश चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए जहां सुशील कटियार के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था।
वहीं डासना के जेलअधीक्षक को निर्देश दिया था कि वह 31 अक्तूबर को पूर्व मंत्री को भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत में पेश करें।