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Budaun News: विकास की कुल्हाड़ी से कटे छह हजार पेड़

संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Sat, 30 May 2026 01:52 AM IST
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Six thousand trees were cut by the axe of development.
बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद - फोटो : Archive
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बदायूं। जिले में सड़क चौड़ीकरण की रफ्तार जहां विकास की नई तस्वीर पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर इसके लिए हजारों पेड़ों की कटान पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिले में विभिन्न सड़कों और हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान करीब छह हजार पेड़ों को काट दिया गया है। वर्षों पुराने इन पेड़ों के हटने से अब सड़कों के किनारे हरियाली तेजी से गायब होती नजर आ रही है।

जो सड़कें कभी घने पेड़ों और छांव के लिए जानी जाती थीं, वहां अब दूर-दूर तक धूप और खालीपन दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा असर बरेली-मथुरा हाईवे और दातागंज मार्ग पर देखने को मिल रहा है, जहां हजारों पेड़ हटाए जाने के बाद सड़क किनारों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन यदि इसके साथ संतुलित पर्यावरण संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में इसका असर गर्मी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आएगा।
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हाईवे चौड़ीकरण में सबसे ज्यादा पेड़ों की कटान
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से बरेली-मथुरा हाईवे के चौड़ीकरण कार्य के दौरान करीब 5650 पेड़ों को काटा गया है। इसके अलावा दातागंज मार्ग के चौड़ीकरण में भी करीब 400 पेड़ों की कटान की गई है।
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इन मार्गों के दोनों ओर वर्षों पुराने नीम, पीपल, शीशम, यूकेलिप्टस और अन्य छायादार पेड़ लगे हुए थे। गर्मी के मौसम में राहगीरों और वाहन चालकों को यही पेड़ राहत देते थे। ग्रामीण अक्सर पेड़ों के नीचे विश्राम करते थे और पशुओं को भी छांव मिल जाती थी। अब चौड़ीकरण के बाद कई किलोमीटर तक सड़क किनारे छांव दिखाई नहीं देती। दोपहर के समय सड़कें तपती नजर आती हैं और राहगीरों को गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।
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क्षतिपूरक पौधरोपण के लिए जमा कराई धनराशि
पेड़ों की कटान के बदले एनएचएआई की ओर से भारत सरकार को डेढ़ लाख पौधे लगाने की धनराशि जमा कर दी गई है। सरकार से धनराशि रिलीज होने के बाद वन विभाग पौधरोपण अभियान शुरू करेगा। वन विभाग ने इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, चंदनपुर क्षेत्र में 130 हेक्टेयर और ननाखेड़ा में 50 हेक्टेयर भूमि पर डेढ़ लाख पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग का दावा है कि बड़े स्तर पर पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। गत वर्ष जिले में वन विभाग की ओर से करीब 14 लाख पौधे लगाए गए थे, जबकि सभी विभागों को मिलाकर 50 लाख पौधे रोपे गए थे। इस वर्ष भी जिले में 50 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
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पुराने पेड़ों की भरपाई आसान नहीं
पर्यावरण के जानकारों की मानें तो हजारों पुराने और बड़े पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाने भर से संभव नहीं है। एक बड़ा पेड़ तैयार होने में 15 से 30 वर्ष तक का समय लग जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने पेड़ वातावरण को ठंडा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, इससे वायु गुणवत्ता बेहतर रहती है। साथ ही पेड़ धूल और धुएं को रोकने में भी सहायक होते हैं। बड़े पेड़ों की कटान से क्षेत्र का सूक्ष्म तापमान प्रभावित होता है। इससे गर्मी बढ़ती है, मिट्टी की नमी कम होती है और वर्षा चक्र पर भी असर पड़ सकता है।
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वर्जन-
हाईवे चौड़ीकरण के लिए जो पेड़ काटे गए हैं, उनके स्थान पर डेढ़ लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए भूमि का चिह्नित कर ली गई है। इस साल भी जिले में 50 लाख पौधे लगाने लक्ष्य है।
- निधि चौहान, डीएफओ

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद- फोटो : Archive

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद- फोटो : Archive

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद

बरेली-मथुरा हाईवे चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़। संवाद- फोटो : Archive

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